Logo
ब्रेकिंग
चीकू की खेती से होगी 5 लाख रुपये तक की कमाई केजरीवाल ने कांग्रेस को हराने के लिए शराब घोटाला किया : अजय माकन बीएमसी बजट 2023-24 - मुंबई के इन पांच जगहो पर लगेंगे एयर प्यूरीफायर ! उद्योग में तकनीकी उन्नयन के लिए एनर्जी बॉन्ड जारी करने पर विचार कर रहा पाकिस्तान मा0 अध्यक्ष जिला पंचायत ने महामाया राजकीय महाविद्यालय भिट्टी में ’’वार्षिक क्रीडा प्रतियोगिता’’ का क... भोपाल-इंदौर में लोकसभा चुनाव से पहले दौड़ेगी भोपाल मेट्रो  छावला गैंगरेप मामले में बरी हुआ शख्स और उसका दोस्त हत्या के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को जमीन पर गिराकर मारने का VIDEO....दो दिन पूर्व का बताया जा रहा, शराब के नशे में था पीड़ित जल्द शुरू होने वाला है दीघा रेलवे स्टेशन, सेंट्रल रेलवे ने पूरी की तैयारी हिंदुओं के हाथ से अगरबत्ती छुड़ाकर मोमबत्ती थमाने के चल रहे प्रयास

महेंद्र प्रसाद के नाम के आगे लगाया जाता था ‘‘King”…. जानिए गरीब किसान के बेटे की अरबपति बनने की कहानी

पटनाः जदयू से राज्यसभा के सदस्य और उद्योगपति महेंद्र प्रसाद का रविवार रात को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। प्रसाद के नाम के आगे अकसर ‘‘किंग” (राजा) शब्द लगाया जाता था, जिसके पीछे एक बड़ी वजह है। महेंद्र प्रसाद गरीबी और बेरोजगारी से तंग आकर 24 साल की उम्र में ही मुंबई भाग गए थे। वहीं 16 साल के बाद वह ‘किंग’ बनकर वापस लौटे थे।

बिहार के जहानाबाद से लगभग 17 किलोमीटर दूर गोविंदपुर गांव के एक भूमिहार परिवार में महेंद्र प्रसाद का जन्म हुआ था। पिता वासुदेव सिंह साधारण किसान थे। इसके बावजूद उन्होंने महेंद्र को पटना कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए करवाई। इसके बाद उनकी नौकरी नहीं लगी तो वह गांव पहुंच गए और काफी परेशान थे। घर की माली हालत ठीक नहीं थी। उस समय उन्हें एक साधु मिला, जिसने उनको एक पुड़िया दी। साथ ही कहा कि इसे नदी किनारे जाकर सपरिवार खा लेना, सारा दुख दूर भाग जाएगा। ग्रेजुएशन के बाद से बेरोजगारी झेल रहे महेंद्र को पता नहीं क्या सूझा, उन्होंने घर के लोगों को नदी किनारे ले जाकर पुड़िया दे दी और खुद भी खा लिया, इसमें परिवार के 2 लोगों की मौत हो गई। यह घटना 1964 की है।

वहीं इस हादसे के बाद जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तो वह गांव छोड़कर मुंबई चले गए। 16 साल बाद वह जहानाबाद 1980 में लोकसभा चुनाव लड़ने लौटे। उस समय वह कांग्रेस के उम्मीदवार थे। पहली बार जहानाबाद के लोगों ने चुनाव में एक साथ इतनी गाड़ियां और प्रचारकों को देखा था। गाड़ियों की चमक और पैसों की खनक ने लोगों के मन में उनकी छवि किंग वाली बना दी।

बता दें कि महेंद्र प्रसाद ने स्थानीय लोगों की मांग पर गरीब और वंचित लोगों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ओकारी, जहानाबाद में एक कॉलेज शुरू किया। इससे उन लड़कियों को भी मदद मिली जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती थी। उनके परोपकारी कार्यों ने उन्हें युवाओं के बीच एक कल्ट के रूप में स्थापित कर दिया और एक साधारण किसान का बेटा ‘किंग’ कहा जाने लगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.