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उपज वापसी की घोषणा से बाजार में दो सौ रुपये क्विंटल तक गिरा बाजरे का भाव, किसानों को नुकसान

भिंड। इस बार बाढ़,अतिवर्षा से बाजरा-ज्वार की फसल में नमी बढ़ी तो प्रदेश में खरीफ सीजन की खरीद नहीं हुई। जो उपज खरीदी भी गई थी उसे वापस किया जा रहा है। इससे बाजार में बाजरे का भाव 200 रुपये प्रति क्विंटल तक तक गिर गया है। अकेले भिंड जिले में किसानों को 11 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। किसानों को भावांतर का लाभ भी नहीं मिल रहा है। यही स्थिति मुरैना, ग्वालियर और बाकी जिलों की है।

दरअसल समर्थन मूल्य पर बाजरा का भाव 2250 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि किसानों को बाजार में 1750रुपये का भाव मिल रहा था। खरीद नहीं होने का आदेश आते ही बाजार में ज्वार 13 सौ रुपये प्रति क्विंटल और बाजरा 1550 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक रहा है।

भिंड जिले में बाजरे के लिए 8907 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनसे 3097 लाख क्विंटल की खरीद होनी थी। ज्वार के लिए 4716 किसानों का पंजीयन हुआ। इनसे 1.67 लाख क्विंटल ज्वार की खरीद होना थी। इससे किसानों को बाजरे में सात करोड़ 94 लाख और ज्वार में भिंड जिले में तीन करोड़ 34 लाख का नुकसान हो रहा है। साथ ही खरीदी गई 22 हजार क्विंटल उपज भी किसानों को वापस की जा रही है।

मुरैना में 38,166 किसान प्रभावित

मुरैना में समर्थन मूल्य पर बाजरा बेचने के लिए 39 हजार 154 किसानों ने पंजीयन करवाया था, जिसमें से मात्र 283 किसानों का ही बाजरा खरीदा गया है। इस साल बाजरा खरीदी का लक्ष्य 1.85 लाख मीट्रिक टन रखा गया था, जिसकी तुलना में करीब 2200 मीट्रिक टन ही खरीदी हो पाई है। यानी 38 हजार 166 किसानों का बाजरा तौला ही नहीं गया है। अब खरीद नहीं होने से किसानों को समर्थन मूल्य का तो नुकसान हो ही रहा था, बाजार में भाव कम होने से भी बड़ा नुकसान हो रहा है।

आदेश नहीं आया, लेकिन भावांतर का लाभ नहीं

पिछले दिलों अंचल में केंद्र सरकार की टीम ने निरीक्षण कर बाजरा और ज्वार की क्वालिटी को परखा था। टीम ने उपज को गुणवत्ताहीन बता दिया है। इसके बाद से ही सरकार ने बाजरा-ज्वार की खरीद नहीं किए जाने का आदेश जारी किया था। बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में लाए गए भावांतर का लाभ भी किसानों को नहीं दिया जा रहा है।

इनका कहना है

खरीद नहीं किए जाने की घोषणा के साथ ही बाजार में व्यापारियों ने भी भाव कम कर दिया है। इससे किसानों का नुकसान और बढ़ गया है। सरकार से हमारी मांग है कि किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया जाए।

संजीव बरुआ, अध्यक्ष, किसान संघर्ष संघ

केंद्र से आई टीम ने ज्वार-बाजरा गुणवत्ताहीन पाया है। इसी से खरीद की मनाही हुई है। उपज गुणवत्ताहीन है तो किसानों को बाजार में बेचने पर फिर भावांतर का लाभ नहीं मिलेगा।

अवधेश पांडे, जिला आपूर्ति अधिकारी भिंड।

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