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आखिर कौन हैं BJP के रथ से उतरकर अचानक साइकिल पर सवाल होने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य

उप्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से बगावत कर इस्तीफा देने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने कुछ पूर्व मंत्रियों के साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा विधायक जिन्होंने पहले अपना इस्तीफा दे दिया था, वे भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव की उपस्थिति में पार्टी कार्यालय में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। स्वामी प्रसाद मौर्य के अलावा, सपा के पाले में जाने वाले अन्य मंत्री धर्म सिंह सैनी भी शामिल थे। आईए जानते हैं भाजपा के रथ से उतरकर अचानक साइकिल पर सवाल होने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य।

प्रतापगढ़ में जन्मे स्वामी प्रसाद ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। वो पहली बार 2009 में विधायक बने थे। 2009 में पहली बार पडरौना से उन्हें जीत हासिल हुई थी। माना जाता है कि स्वामी प्रसाद पिछड़े समाज पर अच्छी पकड़ रखते हैं. वो बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2012 में भी इन्होंने पडरौना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता था। वर्ष 2009 में पडरौना विधानसभा के लिए हुए उपचुनाव में उन्होंने RPN सिंह की मां को हराया था। 8 अगस्त 2016 को बीजेपी में शामिल हुए थे। इसके बाद 2017 में बीजेपी के टिकट पर तीसरी बार चुनाव जीता. वो फिलहाल यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे।

  • 1980 के दशक से राजनीति में पांव जमाए मौर्या ने साल 2012 से साल 2016 तक यूपी विधानसभा (UP Vidhan Sabha) में नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा भी संभाला
  • वह  बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।  हालांकि साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव (2017 UP Assembly Elections) से पहले मौर्या 8 अगस्त 2016 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
  • बीजेपी और बसपा से पहले मौर्या लोकदल में भी रह चुके हैं।

बेटी सांसद, बेटा-बहू भी राजनीति में
स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य बदायूं से बीजेपी सांसद हैं। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में सपा के धर्मेंद्र यादव को हराया था। इतना ही नहीं स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कृष्ट मौर्य रायबरेली की ऊंचाहार सीट से दोबार से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन अभी तक जीत नहीं मिल सकी। हालांकि, स्वामी प्रसाद मौर्य की बहू ऊंचाहार के गौरा ब्लाक से ब्लाक प्रमुख चुनी गई है। स्वामी प्रसाद मौर्य ‘मौर्य’ जाति से आते हैं। यूपी में ओबीसी वोटर्स में यह जाति काफी अहम स्थान रखती है। बताया जा रहा है यूपी में इस जाति के करीब 6 फीसदी वोट हैं और स्वामी प्रसाद मौर्य से सपा को फायदा पहुंच सकता है।

यूपी चुनाव से पहले BJP में बड़ी बगावत
स्वामी प्रसाद मौर्य शुक्रवार को सपा में शामिल होने वाले पांच भाजपा विधायक हैं- भगवती सागर (कानपुर में बिल्हौर), रोशनलाल वर्मा (शाहजहांपुर में तिलहर), विनय शाक्य (औरैया में बिधूना), बृजेश प्रजापति (बांदा में तिंदवारी) और मुकेश वर्मा (फिरोजाबाद में शिकोहाबाद) । सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ से अपना दल (सोनेलाल) विधायक अमर सिंह चौधरी भी सपा में शामिल हो गए। इस्तीफा देने वाले मंत्री और अधिकांश विधायक जो अब तक भाजपा छोड़कर आए हैं, सभी मौर्य के खास माने जाते हैं । स्वामी प्रसाद मौर्य के मंगलवार को उप्र सरकार से इस्तीफा देने के बाद यह सभी विधायक भाजपा छोड़कर आज सपा में शामिल हुए हैं । इनमें से अधिकांश विधायक उत्तर प्रदेश में 2017 के चुनावों से पहले बहुजन समाज पार्टी से भाजपा में शामिल हो गए थे। कुछ भाजपा नेताओं का दावा है कि यह वह विधायक हैं जो जानते हैं कि इस बार उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं दिया जाएगा।

इस्तीफे के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य की बड़ी मुश्किलें!
उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के मंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद बुधवार को सुलतानपुर की एक अदालत ने देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी के एक मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अनिल तिवारी ने बताया कि देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में मौर्य के खिलाफ 18 दिसंबर 2014 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन इस मामले में मौर्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था। उन्होंने बताया कि छह माह की अवधि पूरी हो जाने पर अदालत में आज 12 जनवरी को स्वामी प्रसाद मौर्य को हाजिर होने था, मगर उनके उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। मामले में अगली सुनवाई अब 24 जनवरी को होगी।

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