27 वर्ष पूर्व 04 लोगों की हत्या के मामले में 14 आरोपी दोषी करार
जहानाबाद ! प्रतिबंधित संगठन के लोगों ने आहर की निगरानी कर रहे 4 लोगों की गोली मारकर 27 वर्ष पूर्व हत्या कर दी थी और एक को ज़ख़्मी कर दिया था। ए.डी.जे दो के जावेद अहमद खान की अदालत ने अपने फैसला में सुनाया। सज़ा के बिंदु पर 12 अप्रैल को सुनवाई होगी। 04 लोगों की गोली मारकर हत्या करने व एक अन्य को जख्मी करने के मामले में सोमवार को सुनवाई पूरा करने के उपरांत एडीजे दो जावेद अहमद खान की अदालत ने प्रतिबंधित संगठन के धनंजय यादव, वृंदा यादव, सुशील कुमार, मिथिलेश यादव, विपिन यादव, राजेंद्र यादव, रामकृष्ण यादव, बैजनाथ यादव, अजय यादव, चंद्र घोष यादव, दया सिंह, उपेंद्र यादव, नरेश यादव तथा नागेंद्र यादव को भादवि की धारा 302/34, 307/34 , 148 भादवी एवं 27 शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी करार दिया है। दोषी करार लोगों के सजा के बिंदु पर सुनवाई 12 अप्रैल को होगी। यहां बता दें कि न्यायालय ने धर्मदेव यादव, भगवान यादव, बालेश्वर यादव, विश्वनाथ सिंह, सत्येंद्र सिंह तथा रामराज यादव को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में रिहा करने का फैसला सुनाया है। बताते चलें कि इस मामले में अरवल जिला अंतर्गत करपी थाना क्षेत्र के केयाल गांव निवासी शिव नारायण सिंह ने 30 से 40 अज्ञात प्रतिबंधित संगठन के लोगों को आरोपित करते हुए करपी थाने में कांड संख्या 68/96 दर्ज कराया गया था। दर्ज प्राथमिकी में सूचक ने आरोप लगाया था की गांव के लोग सिंचाई को लेकर आहर में पानी जमा किये हुए थे। जिसे असाढी गांव के लोग काट कर बहा दिया करते थे। जिसकी निगरानी के लिए केयाल गांव के लोगों ने निगरानी दल का गठन किया था। 08 अगस्त 1996 को निगरानी दल के भरत सिंह, मंगल सिंह, रामनिवास सिंह, नवलेश सिंह, प्रमोद कुमार, भोला सिंह, कारू कुर्मी, गंगु कुर्मी सहित कई लोग बांध के समीप झोपड़ी में बैठकर बातचीत कर रहे थे। मध्य रात्रि के करीब 30 से 40 की संख्या में हथियारबन्द लोग आकर झोपड़ी को घेर लिया तथा उपस्थित लोगों के साथ लाठी डंडे से मारपीट करने लगा। इसके साथ ही गोली चला कर भरत सिंह, मंगल सिंह, रामविलास सिंह, एवं नॉलेश सिंह की हत्या कर दी। जबकि प्रमोद कुमार को गोली मारकर जख्मी कर दिया था। इस मामले में अनुसंधानकर्ता के द्वारा 24 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। जिसमें से तीन लोगों की मौत विचारण के दरमियान हो गई थी। जबकि एक आरोपी बसंत सिंह फैसले के दिन अनुपस्थित हो गया। न्यायालय ने बसंत सिंह को उपरोक्त धाराओं में दोषी पाकर उसका बंध पत्र निरस्त कर गैर जमानती अधिपत्र जारी किया है। बताते चलें कि इस मामले में अभियोजन की ओर से 27 गवाह प्रस्तुत किए गये थे।