ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

मनुष्य के जीवन में ईश्वर के बाद माता-पिता का सबसे अधिक महत्व है : विष्णु दास महात्यागी

नासरीगंजन (रोहतास)। प्रखंड के बरडीहां गांव स्थित सूर्य मंदिर परिसर में श्री सूर्यनारायण प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के पूर्व शुरू हुए प्रवचन में परम तपस्वी विष्णु दास महात्यागी जी महाराज ने कहा की मनुष्य के जीवन में ईश्वर के बाद माता-पिता का सबसे अधिक महत्व है। यदि दुर्भाग्य से कोई मनुष्य अपने माता-पिता आदि देवी देवताओं के सान्निध्य को प्राप्त कर उनकी सेवा आदि नहीं करता तो उसका जीवन पशुओं से भी निकृष्ट श्रेणी का होता है। माता-पिता न हों तो हमें मनुष्य जीवन मिलना ही असम्भव है। माता-पिता हमारे जन्मदाता होने के साथ हमारे पालनकर्ता भी होते हैं। वह हमारी शिक्षा व ज्ञान सम्बन्धी आवश्यकताओं को अपने पुरुषार्थ से अर्जित धन का व्यय कर पूर्ति करते हैं।यह कार्य माता पिता के अतिरिक्त समाज में कोई और नहीं करता है।इस प्रकार से माता-पिता से हमें जो लाभ व सुख प्राप्त होता है, उसका ऋण उतारना हमारा कर्तव्य है। यदि हम अपने माता-पिता के प्रति अपना ऋण नहीं उतारेंगे तो कर्म फल सिद्धान्त के अनुसार ईश्वर हमसे उसकी पूर्ति इस जन्म वा परवर्ती जन्मों में करेगा जिसका परिणाम सुख तो होना सम्भव नहीं है,अवश्य दुःख ही होगा। इस लिए माता-पिता की सेवा मानव का धर्म है। अपनी सेवा से माता-पिता को संतुष्ट करने वाला 33 करोड़ देवी देवताओं को भी संतुष्ट कर लेता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि मातृ देवो भव, पीतृ देवो भव।उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान कपिल अपने पिता कर्दम ऋषि जंगल मे जाने के बाद माता देवहूति की सेवा कर रहे थे। माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। माता-पिता रूपी तीर्थ की उपेक्षा कर तीर्थाटन करना मानव के लिए कल्याणकारी नही है। शास्त्रों में माता-पिता का स्थान सर्वोच्च है।यह यज्ञ आठ मई से जलभरी यात्रा से प्रारम्भ होकर 18 मई को पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न होगा।इस सम्बंध में बताते हुए यज्ञ समिति के प्रचार प्रसार मंत्री सन्तोष कुमार सिंह ने बताया कि यह यज्ञ को ले सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।यज्ञ की शुरुआत आठ मई को कलश यात्रा से शुरू होगा जो नौ मई को पंचांग पूजन,10 मई को अर्निमन्थन,11 मई से 14 मई तक हवन प्रारम्भ, साथ ही साथ 12 मई से ही भगवत कथा एवं रासलीला शुरु हो जायेगा।15 मई को श्री भगवान सुर्यनारायण प्राण प्रतिष्ठा,16 व 17 मई को हवन तथा 18 मई को पूर्णाहुति एवं भण्डारा का आयोजन होगा। मौके पर यज्ञ समिति के अध्यक्ष विपिन बिहारी लाल, उपाध्यक्ष राजकुमार, सचिव अजय कुमार, सह सचिव पंकज उपाध्याय, कोषाध्यक्ष भरत सिंह, राम सिंह डीलर, नारायण सिंह, गुड्डू सिंह, बीरेंद्र सिंह, नागेंद्र गुप्ता पूर्व सरपंच, पारस सिंह,बब्लू(आंनद), अमर शक्ति, विद्यानन्द सिंह, गोल्डन, बिट्टू समेत ग्रामीण उपस्थित थे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.