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शेक्सपियर जयंती की पूर्व संध्या पर समारोह का आयोजन

मोतिहारी। प्रसिद्ध अंग्रेजी नाटककार विलियम शेक्सपियर की 459 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव थे। अध्यक्षता प्रो. आनंद प्रकाश, बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने की। कार्यक्रम अध्यक्ष का स्वागत स्वागत अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. बिमलेश कुमार सिंह द्वारा पवित्र भगवद गीता की प्रति एवं अंगवस्त्रम प्रदान कर की गई ।

कार्यक्रम के शुभारम्भ में अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बिमलेश कुमार सिंह ने कविता प्रस्तुत की जो, शेक्सपियर और उनके कृत को समर्पित था । सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति एमए के विद्यार्थियों द्वारा की गई। अंग्रेजी विभाग के एमए द्वितीय वर्ष विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने किंग लियर नामक एक्ट की प्रस्तुति दी। यह मर्चेंट ऑफ वेनिस के ट्रायल सीन का हिंदी रूपांतरण था। अंग्रेजी और भोजपुरी दोनों में शेक्सपियर का सॉनेट पाठ शामिल रहा।
अध्यक्षीय भाषण में प्रो. आनंद प्रकाश ने नाटकों के प्रति अपनी रुचि और लगाव को व्यक्त किया। उन्होंने साहित्य, रंगमंच और सिनेमा माध्यमों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि मनोरंजन हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो.भीम एस दहिया, केयूके के पूर्व वीसी और द शेक्सपियर एसोसिएशन, भारत के अध्यक्ष, ने शेक्सपियर के साहित्य कर्म पर विस्तृत व्याख्यान दिया। अंग्रेजी विभाग के सहायक प्रोफेसर ब्लांडे चंदोबा नरसिंग ने प्रो.भीम एस दहिया का परिचय एवं स्वागत प्रस्तुत किया। प्रो. दहिया ने शेक्सपियर के साथ डॉ. सैमुअल जॉनसन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “शेक्सपियर प्रकृति के साहित्यकार है। उनके वास्तविक जीवन में भी अच्छाई और बुराई, खुशी और दुःख, आँसू और मुस्कान आदि का मिश्रण है।” प्लेटो और उनके साहित्य के विचार के संदर्भ में उन्हें प्रकृति का कलाकार कहा। उन्होंने शेक्सपियर और उनके लेखन को परिभाषित करने और पढ़ने में आधुनिक और उत्तर आधुनिक सिद्धांतों की अपर्याप्तता पर विचार किया।

दूसरे वक्ता प्रो. जगदीश बत्रा का स्वागत डाॅ. दीपक, सहायक प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग ने की।
विशेष अतिथि प्रो. जगदीश बत्रा कार्यकारी डीन, एसएचआई, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत ने इस तरह के आयोजन के लिए डॉ. बिमलेश कुमार सिंह को बधाई दी। प्रो. बत्रा ने व्याख्यान में शेक्सपियर की चर्चा करते हुए जोनाथन गिल हैरिस द्वारा प्रतिपादित शब्द का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने एक विदेशी लेखक को एक मनोरंजनकर्ता के रूप में स्वीकार किया है और उसे साहित्य के प्रतीक के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने चर्चा की कि कैसे शेक्सपियर सभी विभिन्न साहित्यिक काल से आगे निकल गए। वह आज भी प्रासंगिक और सार्वभौमिक है। क्योंकि उनके साहित्य प्रत्येक सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थान को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने बारहवीं रात के प्रसिद्ध हिंदी रूपांतरण, “पिया बहरूपिया” का उल्लेख किया, जिसका बाद में छह अलग-अलग अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद किया गया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. उमेश पात्रा, सहायक प्रोफेसर अंग्रेजी विभाग ने की। डॉ. कल्याणी हाजरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

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