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अब रेडक्रास की सेवा के बहुतेरे आयाम, पीड़ितों का इलाज, बेघरों को घर, दिव्यांगों को तीन पहिया स्कूटी

इंदौर ।   अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर रेडक्रास सोसाइटी की स्थापना तो मानव जीवन की रक्षा और युद्ध में घायल सैनिकों की सहायता के लिए की गई थी, लेकिन अब यह चार कदम आगे जाकर सेवा की बहुतेरी भूमिकाओं में सामने आ रही है। इंदौर जिला रेडक्रास सोसाइटी के माध्यम से जरूरतमंद और गरीब मरीजों का उपचार ही नहीं कराया जा रहा है, बल्कि दिव्यांगों को भी सामान्य लोगों की तरह आवागमन के लिए तीन पहिया स्कूटी उपलब्ध कराई जा रही है। यही नहीं दीन-हीन और दिव्यांग बेघर लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना में घर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हाल ही में दो दृष्टिहीन दिव्यांग परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिलाए गए। इन दिव्यांग दंपतियों के पास आवास की मार्जिन मनी भरने का भी पैसा नहीं था। हकीकत जानकर कलेक्टर इलैया राजा टी ने रेडक्रास सोसाइटी के माध्यम से दोनों परिवारों की तीन लाख की मार्जिन मनी भरी। इनमें दृष्टिहीन दिव्यांग रमेश सेन और किरण लोधी शामिल हैं। नगर निगम ने आवास उपलब्ध कराए और प्रशासन के अधिकारियों ने इन परिवारों का गृह प्रवेश भी कराया। तब इन दिव्यांगों की खुशी देखने लायक थी। दूसरी तरफ प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान जिला रेडक्रास सोसाइटी ने 100 दिव्यांगों को विशेष प्रकार की स्कूटी भी उपलब्ध कराई। इस स्कूटी में रेट्रो फिटिंग कर इसे तीन पहिया रिक्शा की तरह बनाया गया। जिला रेडक्रास सोसाइटी के अध्यक्ष व कलेक्टर इलैया राजा बताते हैं कि दिव्यांग इस विशेष स्कूटी का उपयोग आवागमन के लिए तो कर ही रहे हैं, वे इस पर छोटा-मोटा सामान बेचकर जीविका भी चला रहे हैं।

थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए दो करोड़ की निधि

इंदौर जिला प्रशासन ने रेडक्रास सोसाइटी के माध्यम से सेवा का एक और बड़ा काम किया है। थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए दो करोड़ रुपये की निधि जुटाई गई है। इसके लिए शहर के 20 उद्योगपतियों ने सहायता की है। वे हर वर्ष 10-10 लाख रुपये की राशि देंगे। सोसाइटी का प्रशासनिक कामकाज देख रहे अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर ने बताया कि इस निधि से थैलीसीमिया पीड़त बच्चों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। सोसाइटी ने 50 आपरेशन का लक्ष्य रखा है। इसमें से छह बच्चों के आपरेशन हो भी चुके हैं।

रेडक्रास सोसाइटी के जरिये जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार के लिए सिलाई मशीनें भी उपलब्ध कराई गई हैं। आर्थिक रूप से कमजोर जिन बच्चों के माता-पिता की कोराना से मौत हो चुकी है, जब वे मदद के लिए प्रशासन के पास आते हैं तो उनकी स्कूल और कालेज की फीस भी रेडक्रास सोसाइटी जमा कर रही है।

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