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दशकों पुराना है श्रीमती सुनीता दयाल का समाजिक संघर्ष  – दिव्य अग्रवाल 

गाजियाबाद। से भाजपा की महापौर प्रत्याशी श्रीमती सुनीता दयाल के राजनीतिक व सामाजिक जीवन का लम्बा अनुभव गाजियाबाद विकास के लिए उचित साबित हो सकता है इस बात की स्वीकार्यता शहर की जनता में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो रही है। श्रीमती सुनीता दयाल ने अपने जीवन के लगभग चालीस वर्ष भाजपा की विचारधारा को समर्पित किये हैं । एक समय था जब निजी लाभ देखकर नेता तुरंत दल बदल लिए करते थे व् अपनी विचारधारा को भी समय अनुसार परिवर्तित कर देते थे परन्तु ये बात प्रसंशनीय है की श्रीमती सुनीता दयाल उन चंद लोगों में से एक हैं जिन्होंने संघर्ष के दिनों में भी न तो दल बदला न विचार और भाजपा की विचारधारा को प्रसारित करने में पिछले चार दशकों से प्रयत्नशील रही । शायद यही कारण है की बिना किसी गुट बाजी के सभी जातीयो में श्रीमती सुनीता दयाल की लोकप्रियता बढ़ी है । पश्चिम उत्तर प्रदेश में जातिगत राजनीति व् वर्चस्व की लड़ाई बड़ी है इसमें कोई संदेह नहीं परन्तु श्रीमती सुनीता दयाल के लम्बे  संघर्ष , कर्मठता व् समाजिक सेवा की दृढ़ता के समक्ष किसी प्रकार का जातिगत भेद नहीं है इसमें भी कोई संदेह नहीं है । श्रीमती सुनीता दयाल के लम्बे राजनितिक जीवन की एक बात बिलकुल स्पष्ट है की वो जो बोलती हैं वो निश्चित ही क्रियान्वित भी करती हैं । समाज सेवा व लोकहित में उन्होंने कभी न तो समझौता किया न ही किसी अनावश्यक दबाव में आई । श्रीमती सुनीता दयाल जी का अपनी सभी चुनावी सभाओं में यह कहना है की गाजियाबाद को विकास की नवीन दिशा की और अग्रसारित करेंगी जो इंदौर जैसे स्मार्ट सिटी के समकक्ष होगी तो श्रीमती सुनीता दयाल की कार्यशैली को देखते हुए यह कहा जा सकता है की उनके महापौर बनने पर शायद यह लक्ष्य पूर्ण भी हो सकता है । अतः एक विचारक व लेखक के तौर पर यह लिखने में कोई संदेह नहीं की यदि श्रीमती सुनीता दयाल गाजियाबाद की महापौर बनती हैं तो निश्चित ही शहर की स्थिति उत्तम ही होगी ।

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