ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

कृषि जमीन को छोड़ सभी प्रकार की प्रापर्टी की बिक्री पर लगता है टैक्स, पवन अग्रवाल सीए बिलासपुर

बिलासपुर। आयकर कानूनों के तहत जहां बिक्री मूल्य एग्रीमेंट में उल्लेखित मूल्य सर्कल दर या स्टांप शुल्क मूल्यांकन से कम है, बिक्री मूल्य का मूल्य स्टांप के विधिवत मूल्यांकन या सर्कल दर के अनुसार माना जाएगा। साथ ही पूंजीगत लाभ की तदनुसार गणना भी की जाएगी।

एलटीसीजी पर टैक्स छूट लेने के लिए आप आयकर कानून के सेक्शन 54 का नियम देख सकते हैं. सेक्शन 54 के तहत अगर कोई व्यक्ति निर्धारित समय के अंदर उस रकम से दूसरा घर खरीदता है तो, नए घर में निवेश की गई रकम टैक्सेबल कैपिटल गेंस से घट जाती है। टीडीएस आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194 आइए के अनुसार प्रापर्टी के कुल बिक्री मूल्य के एक प्रतिशत पर लागू होता है।

ग्रामीण कृषि जमीन को छोड़कर सभी प्रकार की प्रापर्टी की बिक्री पर टैक्स लगता है। अचल संपत्ति की बिक्री से होने वाली आय पर प्रापर्टी विक्रेता को दो प्रकार के टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। साथ ही प्रापर्टी के मालिक पर भी यही नियम लागू होते हैं।

अचल प्रापर्टी जैसे जमीन, बिल्डिंग, अपार्टमेंट, घर आदि को आयकर गणना के उद्देश्य से कैपिटल एसेट कहा जाता है। इस प्रकार प्रापर्टी की बिक्री से प्राप्त आय को कैपिटल गेंस माना जाता है और इसमें कैपिटल गेन टैक्स लगता है। पहला शार्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स तब लगता है, जब प्रापर्टी खरीदने के 24 महीने के भीतर उसे बेच दिया जाता है। यह एसटीसीजी राशि विक्रेता की नियमित आय में जोड़ी जाती है और विक्रेता के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.