ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

खरगोन के बाकी माता मंदिर में महिलाएं नहीं पुरुष करते हैं गरबा

खरगोन। देवी के नौ स्वरूपों की आराधना के पर्व नवरात्र की शुरुआत रविवार से हो गई है। श्रद्धालु नौ दिनों तक पूजा- पाठ, व्रत अनुष्ठान और गरबों के माध्यम से देवी की अराधना करेंगे, लेकिन शहर के सराफा बाजार स्थित 300 वर्षों के प्राचीन श्री महाबलेश्वर महादेव श्री दुर्गा देवी बाकी माता मंदिर (बाकी माता मंदिर) में आज भी प्राचीन परंपरागत तरीके से ही नवरात्र के दौरान पूजन और अनुष्ठान होते हैं।

मूर्ति स्वरूप श‍िला के आसपास होते हैं गरबे

यहां मंदिर में महिलाओं के स्थान पर पुरुष माता की मूर्ति स्वरूप श‍िला के चारों ओर घूमकर गरबा गाकर खेलते हैं। वहीं महिलाएं दर्शकों के समान गरबा देखती हैं, लेकिन गरबा खेलती नहीं। मंदिर में देवी के नौ स्वरूपों के साथ अष्ट भैरव, तीन शिव और हनुमानजी की प्रतिमा एक पेड़ के नीचे स्थापित है। जहां रोजाना माता सहित अन्य देवों का पूजन होता है।

प्राचीन परंपरा के अनुसार पूजन

मंदिर के पुजारी रामकृष्ण भट्ट और सहायक पुजारी हेमेंद्र योगी ने बताया कि 21वीं सदी में भी नवरात्र के दौरान बाकी माता का पूजन प्राचीन परंपरा के अनुसार ही किया जाता है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। नौ दिन पूजन के समय महिलाओं के स्थान पर आज भी पुुरुषों द्वारा यहां परंपरागत तरीके से गरबा गाया व किया जाता है और महिला देखती है। यह नियम सदियों से चलता आ रहा है।

इसके साथ मंदिर में नौ दिनों तक अलग-अलग आयोजन किए जाते है। वहीं ऐसी मानता है कि मंदिर पर‍िसर में एक कुआं आज भी है, जहां से माता की मूर्ति स्वरूप शिला नि‍कली थी।इस कुएं के पानी से नवरात्र के दौरान सूर्य उदय से पूर्व स्नान कर माता के दर्शन करने से विभिन्न बीमारियां दूर हो जाती है।

इस कारण से पड़ा मंदिर का नाम बाकी माता

पुजारी ने बताया कि इतिहास के अनुसार सैकड़ों साल पहले एक व्यक्ति को सपने में माता ने दर्शन दिए। जिसके बाद उस व्यक्ति ने ही सन 1732 में मंदिर परिसर में बने कुएं से माता की श‍िलाओं को निकाला और पीपल के पेड़ के नीच स्थापित किया। श‍िला निकालने वाले को लोग प्यार से बा बुलाया करते थे। इसलिए जब से मंदिर का नाम उनके नाम पर बा की माता पड़ गया। आज भी उस कुएं का पानी क्षेत्र के लोग पीने में उपयोग करते हैं।

पांच मंगलवार स्नान कर माता के दर्शन से दूर होते हैं रोग

मंदिर के पूजारी बताते हैं कि मंदिर की मानता है कि नवरात्र छोड़ बाकी के दिनों मे भी यदि मंदिर पर‍िसर में स्थत कुएं किसी बीमार व्यक्ति को पांच मंगलवारों तक स्नान करवाकर माता के दर्शन करवाए जाते हैं और प्रसादी दी जाती है तो हर प्रकार की बीमारी खत्म हो जाती है।

नौ दिनों तक होंगे यह आयोजन

पहले दिन- कीर्तन

दूसरे दिन- शिव महिम्म स्त्रोत पाठ

तीसरे दिन- सुंदर कांड

चौथे दिन- गरबी(खप्पर मंडल द्वारा)

पांचवें दिन- दत्त भजन

छठवें दिन- महिलाओं के भजन

सातवें दिन- हनुमान चालीसा

आठवें दिन- श्री सुक्तम पाठ

नौवें दिन- भजन व ओपन गरबा

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.