भोले बाबा को भूल से भी ना अर्पित करें यह 5 फूल
महाशिवरात्रि एक बहुत बड़ा पर्व है जो हर साल मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 1 मार्च 2022 मंगलवार को मनाया जाने वाला है। आप सभी को बता दें कि फाल्गुन मास की शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा और इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाहोत्सव मनाया जाता है।
हालाँकि भगवान शिव की पूजा में कुछ सावधानियां रखना जरूरी है। जैसे भगवान शिव को कुमकुम का तिलक नहीं लगाया जाता है और इसके अलावा उन्हें तुलसी का पत्ता भी अर्पित नहीं किया जाता है।
इसी के साथ शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता है और उनकी पूजा में हल्दी और रोली का प्रयोग भी नहीं किया जाता है। ठीक ऐसे ही शिवलिंग पर भूलकर भी 5 फूल अर्पित नहीं करने चाहिए। इस लिस्ट में केतकी, कनेर, कमल, चंपा और केवड़ा शामिल है। आप सभी को बता दें कि भगवान शिव की पूजा में केतकी, कनेर, कमल, चंपा और केवड़ा के फूल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जी दरअसल इसके पीछे एक कथा है।
कथा के अनुसार जब ब्रह्मा और विष्णु ने शिव के कहने पर ज्योति स्तंभ का ओर छोर का पता लगाने को कहा तो ब्रह्माजी स्तंभ के उपर का सिरा खोजने गए और विष्णु जी नीचे का सिरा खोजने गए। विष्णु जी ने आकर शिवजी ने कहा कि मुझे इसका कोई अंत नहीं मिला जबकि ब्रह्मा जब उपर गए तो वहां एक जगह उन्हें केतकी नजर आई। उन्होंने केतकी से झूठ बोलने को कहा। ब्रह्मा ने लौटकर कहा कि मैंने इस का अंत ढूंढ लिया। केतकी ने इसके लिए झूठी गवाही दी थी। इससे क्रोधित होकर शिवजी ने केतकी को अपनी पूजा से बाहर कर दिया। तभी से शिव पूजा में केतकी का फूल अर्पित नहीं करते हैं। कमल के फूल पर ब्रह्माजी विरामान हैं। बाकी के फूल माता लक्ष्मी को अर्पित किए जाते हैं। वहीं भगवान शिव एक ऐसे देवता हैं जो मात्र बेलपत्र और शमीपत्र आदि को चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.