आज से शुरू हुआ रमजान का पाक महीना
मुस्लिम धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र महीना यानी रमजान का महीना आज से दुनिया भर में शुरू हो गया है. इस्लाम धर्म के कैलेंडर के मुताबिक साल का 9वां महीना रमजान का होता है. रमजान के इस पूरे महीने के दौरान सभी लोग रोजा या कहें उपवास रखते हैं.रमजान के पाक महीने में मुस्लिम समाज पूरी तरह से इबादत करता है. रमजान के दौरान मुसलमान किसी भी गलत कार्य करने से बचता है. इस दौरान किसी को अपशब्द बोलने, लड़ाई और झूठ बोलने की मनाही होती है. साथ ही स्मोकिंग और शराब का सेवन भी वर्जित माना जाता है. रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद ही ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है. इस बार ईद का पर्व 2 या 3 मई को मनाया जाएगा. ईद-उल-फितर को मीठी ईद कहा जाता है क्योंकि इस दिन घरों में सेवईं बनाने की पंरपरा है. ये पर्व खुशियों और भाईचारे का मानक है. इस दिन लोग गिले-शिकवे भूलाकर एक-दूसरे के प्यार से गले मिलते हैं. रोजे का आरंभ सूर्योदय से पहले के भोजन यानी सहरी के साथ होता है. जबकि इसका अंत सूर्यास्त के बाद शाम को खाए जाने वाले भोजन के साथ होता है, जिसे इफ्तार कहा जाता है.
इस पवित्र महीने में पैगंबर मुहम्मद के कुछ दिशानिर्देशों और नियमों का पालन सभी मुसलमानों द्वारा किया जाता है, जिनमें 29-30 दिनों का उपवास या रोजा रखना भी शामिल है. इसके अलावा, इस पाक महीने का अंत एक भव्य त्योहार और दावत के साथ होता है जिसे ईद-उल-फितर कहा जाता है. इस साल रमजान 2 अप्रैल से शुरू हो गया है. इसकी समाप्ति 1 मई को होगी और अगले ही दिन ईद का त्योहार मनाया जाएगा. हालांकि ये संभावित तारीखें हैं. चंद्र चक्र की वजह से इनमें बदलाव भी हो सकता है.
सूर्योदय के बाद कुछ भी खाने या पीने की इजाजत नहीं
रमजान के पवित्र महीने के दौरान सभी मुसलमान उपवास रखते हैं. सूर्योदय के बाद उन्हें कुछ भी खाने या पीने की इजाजत नहीं होती. लोग सुबह सूरज उगने से पहले ही सेहरी खा लेते हैं. इसके बाद, वे सुबह की नमाज के लिए जाते हैं जिसे फज्र कहा जाता है. सूरज डूबने के बाद वे इफ्तार के समय अपना उपवास खत्म करते हैं. इफ्तार के बाद लोग शाम की नमाज के लिए जाते हैं जिसे मग़रिब कहा जाता है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि सहरी और इफ्तार का समय सूर्य की स्थिति के कारण अलग-अलग होता है
इन मामलों में रोजा रखने की है छूट
इस्लाम को मानने वाले हर बालिग पर रोजा फर्ज है, केवल उन्हें छूट दी गई है जो बीमार हैं या यात्रा पर हैं. इसके अलावा जो औरतें प्रेग्नेंट हैं या फिर पीरियड्स से हैं, उन्हें भी छूट दी गई है. इसके अलावा बच्चों को भी रोजा रखने से छूट दी गई है. हालांकि, पीरियड्स के दौरान जितने रोजे छूटेंगे, उतने ही रोजे उन्हें बाद में रखने होते है. वहीं, बीमारी के दौरान रोजा रखने की छूट है. इसके बावजूद अगर कोई बीमार रहते हुए रोजा रखता है तो उसे अपनी जांच के लिए ब्लड देना या फिर इंजेक्शन लगवाने की छूट है, लेकिन रोजे की हालत में दवा खाने की मनाही की गई है.