महाअष्टमी पर उज्जैन में सुख-समृद्धि के लिए शुरू हुई नगर पूजा
उज्जैन । चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर की सुख-समृद्धि के लिए आज पूजा शुरू हुई। सुबह 7.30 बजे चौबीस खंभा माता मंदिर में माता महामाया व महालया को मदिरा अर्पित कर नगर पूजा की शुरुआत हुई। पूजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी जी महाराज मौजूद रहे। नवरात्र की महाअष्टमी पर सुख-समृद्धि के लिए शहर के 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में नगर पूजा की जाती है। मान्यता है कि नगर पूजा से देवी-देवता प्रसन्न होकर नगर वासियों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पूजा से नगर में व्याधि का खतरा भी नहीं रहता है। नगर पूजा की परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही है। शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर शासन द्वारा नगर पूजा कराई जाती है। चैत्र नवरात्र में भी हुई शुरुआत कुछ सालों से चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर निरंजनी अखाड़े द्वारा नगर पूजा कराई जा रही है। इस बार भी अखाड़े द्वारा पूजा की भव्य तैयारियां की गई है। पूजा में शामिल होने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्रपुरी महाराज उज्जैन आए ।नगर पूजा की परंपरा में कलेक्टर द्वारा माता महामाया व महालया की पूजन का विधान है। कलेक्टर ही देवी को मदिरा की धार लगाकर पूजन की शुरुआत करते हैं, इसलिए अखाड़े की ओर से उन्हें पूजन के लिए आमंत्रित किया गया। चौबीस खंभा माता मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद शासकीय अधिकारी व कोटवारों का दल ढोल-ढमाकों के साथ नगर पूजा के लिए रवाना हुए। शाम 7.30 बजे तक शहर के 40 से अधिक देवी तथा भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना होगी। भजिए-पूरी अर्पित करेंगे नगर पूजा में करीब 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मदिरा की धार लगाई जाती है। इसके लिए तांबे के कलश में छिद्र कर उसमें मदिरा भरी जाती है। कोटवारों का दल कलश लेकर चलते हैं और मदिरा मार्ग पर बहती जाती है। मदिरा के साथ कर्मचारी पूरी, भजिए आदि भी अर्पित करते चलते हैं। मान्यता है इससे अतृप्तों को तृप्ति मिलती है। वह प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
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