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दलित दूल्हे को मंदिर प्रवेश से रोका गेट पर लगाए ताले

उज्जैन जिले के थाना भाट पचलाना क्षेत्र के ग्राम बर्दिया में अनूसूचित जाति के युवक मेहरबान परमार की शादी थी। कल 17/4/22 को शाम बरात निकाली हिन्दू धार्मिक परम्परा अनुसार गांव में स्थित राम मंदिर में दूल्हे को दर्शन कर आगे बढ़ना था। परंतु गांव के दबंगो को यह रास नहीं आया कि कोई दलित दूल्हा मंदिर में पूजा करे। इसलिए संकीर्ण मानसिकता के ऊंची जाति के लोगों ने मंदिर के गेट पर ताले लगा दिए। दूल्हा और परिजन बनौली रोक कर लगभग 1 घण्टे तक मंदिर के बाहर इंतजार करते रहें कि भगवान किसी ऊंची जाति वाले को सद्बुद्धि दे दे । परंतु उम्मीद निराशा में बदल गई 1 घण्टे बाद पुलिस आई परन्तु वह भी दबंगो के सामने नपुंसक बन गई। दलित परिवार मंदिर प्रवेश के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन से मदद मांगी परंतु दबंग गांव वालों के सामने पुलिस भी मूकबधिर नजर आई।

सवाल यह उठता है कि आज हम आजादी के 75 वे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं और आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। ऐसी स्थिति में जब हिन्दू ही हिंदू को मंदिर में प्रवेश नहीं करने देगा। दलित हिंदू को बारात नही निकालने देगा।
तो हम कैसे हिंदू राष्ट्र की संकल्पना को साकार रूप दे सकेंगे।

यह सवाल सभी हिन्दू सनातनियों से???

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