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MSME की नई नीति में लाए जा रहे हैं कई प्रविधान

दिवालिया कानून की वजह से MSME का भुगतान नहीं फंसेगा। नई एमएसएमई पॉलिसी में इस प्रकार के प्राविधान लाए जा रहे हैं जिससे छोटे और मझोले उद्योगों को राहत मिलेगी। दूसरी तरफ एमएसएमई से जुड़ी लोन सुविधा को और आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से लेकर विभिन्न प्रकार की टेक्नोलॉजी की मदद ली जाएगी। हाल ही में एमएसएमई मंत्रालय ने नई एमएसएमई पॉलिसी के लिए मसौदा जारी किया है। स्टेकहोल्डर्स से विमर्श के बाद इस मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। एमएसएमई विशेषज्ञों के मुताबिक अभी अगर कोई कंपनी दिवालिया होती है तो एमएसएमई का भुगतान फंसने की पूरी आशंका रहती है। क्योंकि कानून के मुताबिक दिवालिया होने वाली कंपनी की संपदा वगैरह की बिक्री से प्राप्त राशि से पहले बैंक व सरकारी एजेंसियों का भुगतान होगा, फिर एमएसएमई के बकाए के भुगतान का नंबर आएगा।

उदाहरण के लिए अगर कोई कंपनी दिवालिया हो जाती है और उस पर कुल मिलाकर 100 करोड़ रुपये का बकाया है। दिवालिया प्रक्रिया के तहत जब उस कंपनी की संपदा का मूल्य लगाया जाता है या उस कंपनी की बोली लगाई जाती है तो 80 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं। ऐसे में, उस 80 करोड़ से पहले बैंक का लोन चुकाया जाएगा। फिर अन्य सरकारी एजेंसी अपना हिस्सा लेंगी। कई बार तो एमएसएमई को दिवालिया होने वाली कंपनी से कोई भुगतान नहीं मिल पाता है।

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