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मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश मध्य प्रदेश शासन की बड़ी जीत है

जबलपुर। मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश मध्य प्रदेश शासन की बड़ी जीत है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछले आदेश में राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग, ओबीसी आरक्षण के बिना पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव कराए जाने के निर्देश दे दिए गए थे। चूंकि इस आदेश में संशोधन की पूरी गुंजाइश थी, अत: प्रथमदृष्ट्या उपलब्ध वैधानिक आधार पर माडिफिकेशन एप्लीकेशन दायर की गई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का ध्यान ओबीसी आयोग द्वारा ट्रिपल टैस्ट की मर्यादा का पालन करते हुए परिसीमन के सिलसिले में काफी आगे बढ़ चुकने की जानकारी दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सभी बिंदुओं को रिकार्ड पर लेकर आरक्षण का प्रतिशत 50 प्रतिशत से अधिक न होने की शर्त के साथ अपना बिना ओबीसी आरक्षण पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव काराने संबंधी पूर्व आदेश संशोधित कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट की जीत, सरकार की नहीं : राज्यसभा सदस्य तन्खा

राज्यसभा सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश मध्य प्रदेश शासन की बड़ी जीत नहीं बल्कि स्वयं सुप्रीम कोर्ट की बड़ी जीत है। ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक व्यवस्था व विहित प्रविधान के अनुरूप संशोधित आदेश पारित किया है। अब गेंद निर्वाचन आयोग के पाले में है। उसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुरूप पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करनी है, जिसमें आरक्षण के प्रतिशत की सीमा-रेखा का ध्यान रखना होगा। यदि मध्य प्रदेश शासन ने समय रहते उचित कदम उठाया होता तो इस तरह पहले मुंह की न खानी पड़ी होती और ओबीसी वर्ग को नुकसान भी न होता।

संविधान के संशोधनों पर गौर करने के बाद किया संशोधन : विशेष अधिवक्ता सिंह

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में ओबीसी वर्ग की पैरवी के लिए मध्य प्रदेश शासन द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट को संविधान के 102 व 127 वें संशोधन के संदर्भ में अवगत कराए जाने के बाद संशोधन आवेदन पर राहत का आदेश पारित किया गया है। इसी के साथ अब ओबीसी आयोग ट्रिपल टैस्ट की मर्यादा के अनुरूप अपना कार्य निरंतर रखने स्वतंत्र हो गया है। हालांकि उसे अब 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा के दायरे में रिपोर्ट पेश करनी होगी।

निर्वाचन आयोग एक सप्ताह के भी अधिसूचना जारी करेगा

मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की बहस के दौरान उन्होंने निर्वाचन आयोग का पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के पक्ष को रिकार्ड पर लिया। इसी के साथ एक सप्ताह में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण न होने की शर्त का पालन सुनिश्चित कराने के दिशा-निर्देश के साथ मध्य प्रदेश में पंचायत व नगरीय निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने की व्यवस्था दी गई है।

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