इंदौर में पिछड़ा वर्ग की पांच सीटें बढ़ेंगीं
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सामने आया समीकरण, एक सीट पर फंसा तकनीकी पेंच, 4-5 दिन में की जाएगी आरक्षण प्रक्रिया
इंदौर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इंदौर नगर निगम के वार्ड आरक्षण को लेकर जोड़-घटाव शुरू हो गया है। 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिए जाने के निर्देश के बाद इंदौर निगम में 32 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण दिया जाएगा। उस हिसाब से सीटें तो छह बढ़ाई जाना चाहिए, लेकिन तकनीकी पेंच की वजह से पांच ही बढ़ पाएंगीं। संभावना है कि चार-पांच दिन में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
मध्यप्रदेश शासन की मजबूत दलील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण दिए जाने पर मुहर लगा दी। साथ में शर्त भी रखी कि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उसके हिसाब से इंदौर नगर निगम को लेकर जोड़-घटाव शुरू हो गया है। इंदौर में 2011 की जनगणना में आबादी के हिसाब से 15 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति और तीन प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। दोनों को मिला दें तो 18 प्रतिशत हो रहा है और सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से 50 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जा सकता है तो बचा हुआ 32 प्रतिशत का आरक्षण ओबीसी को दिया जाएगा।
वर्तमान में ओबीसी की कुल 21 सीटे
वर्तमान में इंदौर में ओबीसी की कुल 21 सीटें हैं और 32 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से अब छह सीटें बढ़ाई जानी हैं, लेकिन उसमें एक पेंच आ रहा है। प्रतिशत के हिसाब से सीट बढ़ाई जाती है तो उसका आंकड़ा 27 हो जाएगा।
उसके अलावा अजा व अजजा की 18 सीटें मिलाएंगे तो 43 सीटें हो जाएंगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना हो सकती है।
वहीं, 85 सीट में से 43 सीटें आरक्षित कर दी जाती हैं तो 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण हो जाएगा। उसको देखते हुए जिला निर्वाचन को ओबीसी की सीट 27 के बजाय 26 करना होगी यानी छह के बजाय पांच ही सीटें बढ़ेंगी। ऐसा करने से कोर्ट की अवहेलना नहीं होगी। गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन व नगरीय प्रशासन की तरफ से निर्देश मिलते ही आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। संभावना है कि चार-पांच दिन में नए सिरे से वार्डों का विभाजन हो जाएगा।
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