जानिए PM की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कैसे बनाई जाती है सुरक्षा योजना

प्रधानमंत्री के किसी भी दौरे के लिए पुख्ता सुरक्षा की योजना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों से लेकर राज्य पुलिस बल को शामिल किया जाता हैं। एसपीजी की ओर से बकायादा पूरे दिशा-निर्देश इस संबंध में उसकी ब्लू बुक में दर्ज हैं। पीएम के किसी भी यात्रा से तीन दिन पहले उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाली एसपीजी एक एडवांस सिक्योरिटी लायजन (एएसएल) तैयार करती है। एएसएल आसान शब्दों में एक ‘डायरी’ है। जिसमें सुरक्षा संबधी सारी जानकारी दर्ज रहती है। रिपोर्ट तैयार करने से पहले एसपीजी संबंधित राज्य, राज्य पुलिस में इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों सहित कार्यक्रम को सुरक्षा मुहैया कराने वाले अधिकारियों, संबंधित जिला मजिस्ट्रेट आदि से विस्तार से चर्चा करती है। सुरक्षा एजेंसियां हमेशा दूसरी योजना भी बनाकर रखती हैं। हमेशा पीएम के किसी भी कार्यक्रम से पहले मौसम की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा जाता है। एक अधिकारी के अनुसार पीएम को भले ही हवाई मार्ग से जाना हो पर अगर उड़ान संभव नहीं हो तो सड़क मार्ग से जाने का विकल्प भी पहले से तैयार रखा जाता है।

पीएम के दौरे को लेकर हर पहलू पर होती है चर्चा
मीटिंग में हर पहलू पर बात होती है- मसलन पीएम कैसे आएंगे (हवाई मार्ग से, सड़क मार्ग से या रेल से), अगर हवाई मार्ग से आएंगे तो आयोजन स्थल तक कैसे जाएंगे? इसके लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल होगा या फिर सड़क मार्ग का? इन तमाम बातों को तय करने के लिए केंद्रीय सहित स्थानीय इंटेलिजेंस की मदद की ली जाती है। ऐसे ही आयोजन स्थल की सुरक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। पीएम किस ओर से वहां दाखिल होंगे, किस गेट से बाहर निकलेंगे, कार्यक्रम में कौन-कौन लोग आ सकते हैं, इन सारी बातों का ख्याल रखा जाता है। अगर पीएम का कार्यक्रम किसी हॉल या बंद जगह पर है तो वहां फायर सेफ्टी के इंतजाम पर भी ध्यान होता है। साथ ही पीएम को अगर किसी नाव पर सवार होकर कही जाना है, तो यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह पूरी तरह सुरक्षित हो।

राज्य की यात्रा के लिए स्थानीय पुलिस जिम्मेदार
यूपी के पूर्व डीजीपी और एसपीजी में अपनी सेवा दे चुके ओपी सिंह बताते हैं कि एसपीजी पीएम को केवल निकटवर्ती सुरक्षा देता है। जब पीएम किसी भी राज्य की यात्रा कर रहे होते हैं तो सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य पुलिस की होती है। उनके पास खुफिया जानकारी जुटाने, मार्ग की मंजूरी, स्थल की सफाई और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है। किसी भी खतरे के बारे में इनपुट देने की जिम्मेदारी केंद्रीय खुफिया एजेंसियों पर होती है। हालांकि, सुरक्षा की व्यवस्था कैसे की जाए इस पर अंतिम फैसला एसपीजी ही करती है। सूत्रों के अनुसार जब तक स्थानीय पुलिस से ग्रीन सिग्नल नहीं मिलता तब तक एसपीजी पीएम के किसी भी मूवमेंट को आगे नहीं बढ़ने देती है। बड़ी-बड़ी रैलियों और भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी सादे कपड़ों में लोगों के बीच खड़े किए जाते हैं। कई बार उन्हें बतौर पार्टी कार्यकर्ता भी भीड़ में खड़ा किया जाता है ताकि वे हर हरकत पर नजर रख सकें।

पंजाब में सुरक्षा चूक को लेकर विवाद
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीते बुधवार को पंजाब दौरे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पीएम मोदी की फिरोजपुर में रैली थी लेकिन वे रैली स्थल तक नहीं पहुंच सके। प्रदर्शनकारियों ने पूरा रास्ता ब्लॉक करके रखा हुआ था और पंजाब पुलिस प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने पर नाकाम रही। दरअसल पीएम मोदी ने पहले हेलिकॉप्टर से फिरोजपुर जाना था लेकिन खराब मौसम की वजह से कार्यक्रम में फेरबदल हुआ और पीएम को सड़क मार्ग से फिरोजपुर ले जाने का फैसला हुआ। पंजाब पुलिस को इसकी जानकारी दे दी गई और उन्होंने दो घंटे तक का समय मांगा। हालांकि पूरी योजना उस समय धरी की धरी रह गई जब एक फ्लाईओवर पर पीएम का काफिला करीब 20 मिनट तक फंसा रहा।

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