मेरा गांव मुसेहरी
मंदिर,मस्जिद, नहर, नदियां
ऐसा गांव हमारा है।
इसे बचाएंगे मिलकर
अब ये अपना नारा है।
बचपन से हम रहते आए
सुख शांति की गोद में
धीरे धीरे बड़े हुए सब
आमोद और प्रमोद में।
पता नहीं चला था मुझको
कौन दुश्मन कौन यारा है।
इसे बचाएंगे मिलकर
अब ये अपना नारा है।
अपने गांव में रहने वालों
किसी को कम मत आंको
सबकी निगाहें सब पर है
किसी के घर में मत झांको
हिंदू ,मुस्लिम भाई ~भाई
ये रिश्ता कितना प्यारा है।
इसे बचाएंगे मिलकर
अब ये अपना नारा है।
चलो युवाओं आगे आओ
गांव की गरिमा को बचाओ
पूर्वजों की धरोहर
शानों शौकत फिर से लाओ
सच बोलें तो बिना गांव के
होता कहां गुजारा है
इसे बचाएंगे मिलकर
अब ये अपना नारा है
रग रग में दौड़ रहा है
रंग लहू का एक है
मज़हब यही सिखाता है
रखो इरादा नेक है
फिर भी जाति मज़हब का
ये कैसा बंटवारा है।
इसे बचाएंगे मिलकर
अब ये अपना नारा है।
अपनों ने ही लूट रहे
खुलमखुला छूट रहे
गांव का दम घूंट रहे
आज गांव का ही जनता
अब क्यों लगता बेचारा है।
इसे बचाएंगे मिलकर
अब ये अपना नारा है।
@राजकान्ता राज।