श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को जागत जोति गुरु की उपाधि से नवाजा गया
सासाराम। सिख धर्म में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को जागत जोति गुरु की उपाधि से नवाजा गया है दशम पिता सरबंसदानी श्री गुरु गोविंद सिंघ पातशाही जी ने अपने बाद सभी सिकखों के लिए अपने जीवन की पहली और अंतिम आदेश दिया था “आज्ञा भई अकाल की तवै चलायो पंथ सभ सिक्खन को हुक्म है गुरु मान्यो ग्रंथ’ इस शिरोमणि महावाक्य के अनुसार दुनिया भर के सिक्ख सिर्फ तो सिर्फ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही अपना सब कुछ मानते जानते एवं उनके बताए राह पर चलने की प्रयास भी करते रहते हैं एक ऐसा ग्रंथ जहां दुनिया भर के सभी संत महापुरुषों सूफियों की वाणी का अनमोल संग्रह(खजाना) भी है इस गुरु ग्रंथ साहिब जी जब मस्ताना या यूं कहें गुरुग्रंथ साहिब जी के पन्ने काफी जर्जर स्थिति में आ जाते हैं तब इनका भी संस्कार पूरी मर्यादा के अनुसार देश के चिन्हित विभिन्न स्थानों पर किया जाता है जहां संस्कार की रस्म अदा की जाती है उसे हम अंगीठा साहिब के नाम से भी जानते हैं इन सभी वृद्ध गुरु ग्रंथ साहिब जी को की भी सेवा कुछ जाने-माने सिख संस्थाएं करती रहती हैं उसी क्रम में जबलपुर (मधयप्रदेश) सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के द्वारा संग्रह सेवा की जाती है आज उसके जत्थेदार भाई साहब भाई हरविंदर सिंह जी अपने सेवादार साथियों के साथ कोलकाता जाने के क्रम में ऐतिहासिक गुरुद्वारा चाचा फगुमल साहिब सासाराम में रुक रात्रि विश्राम कर अगले दिन कोलकाता की तरफ बढ़ चले आए हुए सेवादारों को सासाराम की यात्रा बड़ी सुहावनी लगी आपने कहा भी कि मैं जब जब इस सेवा कार्य में निकलता हूं और जब जब रास्ते में सासाराम पड़ता है तो मैं मन बना कर रहता हूं रात्रि विश्राम चाचा फगुमल साहिब जी के चरणों में ही हो मुझे बड़ी खुशी यहां के सिकख संगत की सेवा समर्पण को देख कर मौके पर जत्थेदार सर्वजीत सिंघ खालसा एडवोकेट ने सभी आगंतुकों की अगवानी की एवं प्रधान सरदार सुचित सिंघ जी ने सिरपाओ देकर सम्मानित भी किया वही मौके पर मीत प्रधान सरदार मंजीत सिंह जनरल सेक्रेटरी सरदार सुमेर सिंघंसरदार हरगोविंद सिंघ कैशियर सरदार चरणजीत सिंघ सरदार मोहित सिंघ सरदार जामवंत सिंघ सरदार धर्मेंद्र सिंघ सरदार हरप्रीत सिघं रविंदर सिंघ सरदार गुरमुख सिंघ रंजना कौर सुनीताकौर एवं हेड ग्रंथि भाई साहब भाई रंजीत सिंघ जी ने सभी आगंतुकों को गुरु घर के ऐतिहासिक धरोहरो का दर्शन भी कराया मौके पर हजूरी रागी जत्था भाई साहिब भाई विकास सिघं भाई पंकज सिंघ ने शब्द कीर्तन के द्वारा हाजरी भरी वही गुरु का अटूट लंगर भी चला