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चांदन और कटोरिया के गोदाम से,हर माह कहां जाता है लाखों का अनाज

बांका : चांदन और कटोरिया गोदाम से हर माह लाखो का चावल और गेहूं आखिर कहां गायब हो जाता है। और इस आज तक बार बार शिकायत के बाबजूद कोई छानबीन क्यो नही होता है। जबकि इसका सीधा खामियाजा पीडीएस दुकानदार को सहना पड़ता है।  राशन कार्ड धारी उपभोक्ताओं को मात्रा से कम राशन दिए जाने की शिकायत इन दिनों लगातार मिल रही है। जिसके लिए पदाधिकारियों द्वारा पीडीएस दुकानदार को बलि का बकरा बनाया जाता है।लेकिन इसकी सच्चाई पर किसी ने ध्यान नही दिया है। आम लाभुक  जिसका  जिम्मेदार लोग सीधे डीलर को मानते हैं। मगर इसके पीछे हकीकत कुछ और है। एसएफसी गोदाम से ट्रांसपोर्टर द्वारा होम स्टेप डिलीवरी देने के दौरान प्रत्येक बोरे में दो से आठ किलो तक अनाज कम दिया जाता है। इतना ही नहीं एजीएम दावे के साथ डीलरों से प्रत्येक बोरे पर एक किलो अनाज कम देने की बात करता है। इसका विरोध करने वाले डीलरों को फटा बोरा कम राशन दिए जाने की शिकायत आम है। ऐसे में डीलर सही मात्रा में उपभोक्ताओं को राशन दे तो दे कैसे इस पर कभी ध्यान नही दिया गया। कई डीलरो ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि  हर माह  प्रत्येक बोरे में दो किलो से लेकर आठ किलो वजन कटौती किया गया। खाद्यान्न कालाबाजारी को लेकर कटोरिया एवं चांदन पहले से ही चर्चा में हैं। जिसमें अधिकारी से लेकर कई सफेदपोश की इस गोरखधंधे में चांदी कट रही है। सिर्फ जुलाई महीने की बात करें तो ओनलाइन रिपोर्ट के अनुसार चांदन प्रखंड में गेहूं 151086 किलो एवं 613820 किलो चावल उपलब्ध कराया गया है। जबकि कटोरिया प्रखंड में गेहूं 167103 किलो एवं 670128 किलो राशन उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रत्येक 50 किलो के बोरे में दो किलो से लेकर आठ किलो तक राशन कम दिया जाता है तो कितनी बड़ी मात्रा में गरीबों को मिलने वाले खाद्यान्न की कालाबाजारी हो रही है। तो वह जाता कहां है।और कौन कौन इसमे हिस्सेदार है। नियमानुसार प्रत्येक डीलर को आवंटन के अनुसार वजन कर राशन उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। मगर चांदन एवं कटोरिया प्रखंड में अफसरशाही चरम पर होने के कारण मनमाने तरीके से डीलरों को राशन उपलब्ध कराया जाता है। कम राशन देने का विरोध करने वाले डीलरों को परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है। यहां तक कि दुकानों पर लगातार करा कर अनाज कम देने और अधिक राशि लेने की बात बताकर परेशान किया जाता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को उनके हक का सही मात्रा में राशन मिलने की संभावना दूर तलक संभव नहीं दिख रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसकी सही जांच की जाए तो खाद्यान्न कालाबाजारी का एक बड़ा रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है। इस संबंध में पूछने पर एमओ मिथिलेश कुमार झा ने बताया कि मेरे योगदान के बाद हाल ही में मुझे गोदाम से कम अनाज देने की शिकायत मिली थी।फिर मेरे द्वारा वरीय पदाधिकारियों से  बात कर इस माह से कुछ सुधार किया गया है। और अब अगले माह से मैं खुद निगरानी करते हुए तोल का गोदाम से अनाज दिला दिया करूंगा।

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