इंदौर में बन रहे हैं 3 बटरफ्लाय पार्क, 80 प्रजाति की तितलियां देख सकेंगे पर्यटक
इंदौर: मल्हार आश्रम में और तीसरा रालामंडल अभयारण्य के मुख्य द्वार पर। मकसद इंदौर की बायोडायवर्सिटी बढ़ाना हैतितलियां ईको सिस्टम की महत्वपूर्ण कड़ीइंदौर के प्रचलित स्थानों पर दो-दो एकड़ जमीन पर तीन बटरफ्लाय पार्क तैयार किए जा रहे हैं। पहला, सिरपुर तालाब पर जिसके लिए दो साल पहले जमीन चिन्हित की गई थी। दूसरा, मल्हार आश्रम में और तीसरा रालामंडल अभयारण्य के मुख्य द्वार पर। मकसद इंदौर की बायोडायवर्सिटी बढ़ाना है।दरअसल तितलियां ईको सिस्टम की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ये परागण जैसी प्रक्रिया पूरी करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि तितलियां न हों तो कई प्रजातियों की वनस्पतियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। इसलिए तितलियों की तादाद बढ़ाना ज़रूरी है। शहर के नेचर लवर्स इसमें जुटे हुए हैं। बारिश के बाद ये तीनों पार्क में लगाए गए पौधों पर फूल आ जाएंगे और फूल आने से तितलियां भी आ जाएंगी।हाल ही में चार नई प्रजाति मिलीइंदौर में कुल 80 प्रजाति हैं, हाल ही में 4 नई मिली होलकर साइंस कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रहे हर्ष विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने पिछले 6 माह में 4 ऐसी प्रजाति की तितलियां देखी हैं जो इंदौर के 200 किमी के एरिया में कभी नहीं देखी गईं। ये हैं लार्ज ओकब्लू, एंगल्ड पायरेट, ग्रिजल्ड स्किपर और रापाला इअरबस। होलकर कॉलेज हर दो साल में तितलियों की गणना करता है जिसके अनुसार इंदौर में पिछले 8 साल में तितलियों की संख्या दोगुना हुई है। इंदौर में 2014 में 37, 2016 में 47, 2020 में 51 और अभी 9 माह पहले यानी 2021-22 में इंदौर में 67 प्रजाति की तितलियां देखी गईं। इंदौर में तितलियों की कुल 80 प्रजातियां देखी गई हैं।
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