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कंज्यूमर कोर्ट ने 9.21 लाख ब्याज सहित चुकाने और कोर्ट खर्च भी भरने को कहा

चंडीगढ़: सेक्टर 19 स्थित चंडीगढ़ कंज्यूमर कोर्ट। (फाइल)चंडीगढ़ कंज्यूमर कोर्ट ने पंजाब सरकार को एक मामले में 1 लाख रुपए हर्जाना ठोका है। पंजाब सरकार अपने एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में समय पर कंस्ट्रक्शन वर्क शुरु नहीं कर पाई थी। वहीं जब शिकायतकर्ता ने रिफंड मांगा तो वह भी नहीं दिया। कोर्ट में पंजाब सरकार ने कई अवसर देने के बावजूद जवाब पेश नहीं किया। वहीं फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने जवाब पेश किया तो उसके साथ कोई साक्ष्य नहीं दे सकी।कोर्ट ने पंजाब सरकार और फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को आदेश दिए हैं कि वह 29 नवंबर, 2019 को शिकायत दायर करने से रकम चुकाने तक 9,21,476 रुपए 9 प्रतिशत ब्याज सहित चुकाए। इसके अलावा 1 लाख रुपए हर्जाना भरने के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना और शोषण झेलना पड़ा। इसके अलावा 30 हजार रुपए अदालती खर्च के रुप में देने के भी आदेश दिए गए हैं।कोर्ट ने फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के जवाब को अधूरा पायाकंज्यूमर कोर्ट ने कहा कि भले ही फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने शिकायतकर्ता के आरोपों को नकारा है मगर इसके पक्ष में कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सके। वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने फोटोग्राफ पेश कर बताया कि साइट पर कोई काम शुरु नहीं हुआ। वहीं शिकायतकर्ता ने रिफंड को लेकर 1 सितंबर, 2019 को लीगल नोटिस भी भेजा था। ऐसे में प्रतिवादी पक्ष यह नहीं कह सकता कि रिफंड नहीं मांगा गया।इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, फाजिल्का का ऑफिस। (फाइल)कंज्यूमर कोर्ट ने कहा कि अभी तक रकम प्रतिवादी पक्ष के पास जमा है और वह शिकायतकर्ता को नुकसान पहुंचा कर उस रकम से गैरकानूनी ढंग से लाभ प्राप्त कर रहे हैं। शिकायतकर्ता को उसकी शिकायत के निवारण के लिए अनिश्चितकाल के लिए इंतजार नहीं करवाया जा सकता। शिकायतकर्ता अवश्य ही ब्याज सहित रिफंड पाने का हकदार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई अवसर देने के बावजूद पंजाब सरकार की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया। वह सिर्फ फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को लेटर्स लिख कर अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता।चंडीगढ़ के अंशुल चाहते थे फाजिल्का में हाउसिंग प्लाटचंडीगढ़ सेक्टर 46 के अंशुल मोंगा ने पंजाब सरकार को इसके लोकल बॉडीज विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, फाजिल्का और इसके एग्जीक्यूटिव अफसर को पार्टी बनाया था। शिकायतकर्ता ने फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की सेठ मुंशी राम अग्रवाल 16.38 एकड़ डेवलपमेंट स्कीम के तहत प्लाट के लिए आवेदन किया था। शिकायतकर्ता को कार्नर का एक प्लाट अलॉट हुआ था। 1 जून, 2015 को बाकायदा प्रतिवादी पक्ष ने इसकी जानकारी दी थी। इसके लिए शिकायतकर्ता ने 9,21,476 रुपए जमा करवाए थे।साइट पर कोई डेवलपमेंट वर्क शुरु न होने पर शिकायतकर्ता ने रिफंड मांगा। कई बार प्रार्थना करने और लीगल नोटिस भेजने के बावजूद उनकी रकम रिफंड नहीं की गई। इस कृत्य को सेवा में कोताही और गलत व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होना बताते हुए शिकायत दायर की गई थी।फाजिल्का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने अपने जवाब में कहा कि शिकायतकर्ता को ड्रा सिस्टम ने प्लाट अलॉट हुआ था। वहीं साइट पर बुनियादी सहुलतों और डेवलपमेंट वर्क शुरु न होने के आरोपों को गलत बताया था। वहीं इस बात को भी नकारा गया कि शिकायतकर्ता ने रिफंड मांगा था। ऐसे में शिकायत को रद्द करने की मांग की गई।

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