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बिजली बिलों में सुधार के लिए लग रहा लंबा समय

भोपाल । प्रदेश में बिजली बिलों में होने वाली गड़बड़ी को सुधारने का अधिकार अब अधीक्षण यंत्री को दे देने से इस प्रक्रिया में अब लंबा समय लग रहा है। इससे उपभोक्ता परेशान है।  बिजली वितरण कंपनियां अब बिलों में सुधार कराने के लिए उपभोक्ताओं से चक्कर लगवा रही है। पूर्व में जब भी उपभोक्ता बिलों में गड़बड़ी का दावा करते थे और सुधार की मांग करते थे तो नजदीक के जोन कार्यालय में जाने पर आधे से एक घंटे के भीतर सुधार कर दिया जाता था। कुछ बिलों में छानबीन की जरूरत पड़ती थी तब भी एक दिन से अधिक का समय नहीं लगता था। उस समय ये अधिकार जोन पर तैनात सहायक यंत्री व कनिष्ठ यंत्रियों के पास होते थे। अब ये अधिकार अधीक्षण यंत्री को दे दिए हैं। जिसकी वजह से सुधार कराने की प्रक्रिया जटिल हो गई है और सुधार में 25 दिन से लेकर एक महीना लग रहा है। दरअसल, बिजली वितरण कंपनियों ने सहायक यंत्री व कनिष्ठ यंत्रियों से बिलों में सुधार के अधिकार छीनकर अधीक्षण यंत्री को दे दिए हैं। अब उपभोक्ता पूर्व की तरह जोन में आवेदन तो करते हैं लेकिन इनके आवेदनों को अब जोन से डिविजनल कार्यालय भेजा जाता है और वहां से अधीक्षण यंत्री कार्यालय भेजा जाता है। फिर वहां से सुधार की अनुमति मिलने के बाद बिलों में गलती सुधारी जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि समय लगता है। इतना ही नहीं, पुराने बिल में सुधार होने से पहले कई बार अगले महीने के बिल आ जाते हैं। सुधार की इस प्रक्रिया में बार-बार जोन कार्यालय जाना पड़ता है। पूर्व में ये सुधार जोन कार्यालय में आधे से एक घंटे के बीच हो जाते थे। चक्कर लगाने की जरुरत भी नहीं पड़ती थी। वैसे तो बिजली वितरण कंपनियां हर बदलावों व नई व्यवस्थाओं की जानकारी उपभोक्ताओं से साझा करती हैं। लेकिन बिलों में सुधार से जुड़ा नियम बदलने वाली अहम जानकारी कंपनी ने छुपा ली और लागू भी कर दी है। अब उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं और जोन कार्यालयों से लेकर अधीक्षण यंत्री के कार्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि कंपनी का दावा है कि उसने पारदर्शिता के चलते यह कदम उठाया है। मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी समेत तीनों बिजली कंपनियों में यह व्यवस्था लागू कर दी है। मध्य क्षेत्र बिजली कंपनी के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर व सागर संभाग के जिलों में उपभोक्ता खासे परेशान हो रहे हैं।

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