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सड़कों की लंबाई दोगुनी हुई लेकिन गाड़ियों की संख्या तीन दशक में 21 गुना बढ़ी

राजधानी दिल्ली देश के उन शहरों में शुमार है जो आए दिन ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है। पिछले तीन दशकों में दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की संख्या में लगभग 21 गुना वृद्धि हुई है, जबकि सड़क की लंबाई केवल दोगुनी हुई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में दिल्ली में सभी कैटेगरीज के 1.22 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड व्हीकल थे।1981 से 2021 तक तीन दशक के बीच मोटर व्हीकल्स की तादाद में लगभग 21 गुना बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं इसी टाइम पीरियड में सड़क की लंबाई 15,487 किमी से बढ़कर महज 33,198 किमी हो सकी है।गाड़ियों की संख्या से बढ़े एक्सीडेंट्सराजधानी की सड़कों पर लगातार बढ़ती भीड़ ने कई परिवहन समस्याओं में खुद को प्रकट किया है। मेन रोड का ट्रैफिक सड़कों की वहन क्षमता की दहलीज को लगभग पार कर गया है। बढ़ती आबादी और सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। व्हीकल पॉप्युलेशन, मानव व्यवहार, अधूरे और कम ट्रैफिक साइन, डिफेक्टिव रोड डिजाइन, गाड़ियों की डिजाइनिंग में खामियां, कुछ ऐसे कारण हैं जो दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ा रहे हैं।इनके अलावा शराब पीकर गाड़ी चलाना, ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग, यातायात नियमों का उल्लंघन भी सामान्य कारण हैं।एक साल: मौतें- 1239, चालान 80 करोड़ से ज्यादादिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक 2021 में राजधानी में सड़क दुर्घटनाओं में 1,239 लोगों की जान चली गई, जबकि 4,273 घायल हुए। वहीं 2020 में दिल्ली में सड़क दुर्घटना में सबसे ज्यादा 1,196 मौतें हुईं, उसके बाद चेन्नई में 872 और बेंगलुरु में 646 मौतें हुईं।अधिकारियों का कहना है कि 2020-2021 में, दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने के लिए, गलत सड़क यूजर्स के खिलाफ मुकदमा चलाने की रणनीतियों बनाई गई थी।2021 में स्पॉट चालान 13,23,556 को और 65,69,985 को नोटिस वाहन चालकों को जारी किए गए थे। जिसके बाद 9,79,80,500 और 71,82,19,300 रुपए की चालान राशि ट्रैफिक पुलिस को मिली थी।

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