ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

बारिश की भेंट चढ़ा मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा रावण

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में इस साल प्रदेश के सबसे बड़े रावण दहन की तैयारी की गई थी, लेकिन बारिश के चलते रावण भीग गया और रावण के पुतले को करीब 25 से 30 लीटर पेट्रोल डालकर जलाना पड़ा।
दरअसल छतरपुर की लाल कड़क्का रामलीला समिति ने रामलीला मंचन के 125 वर्ष पूर्ण होने पर इसे यादगार बनाने के लिए 125 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण कराया था। जो कि मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा रावण था। रावण के इस पुतले को सवा महीने में 6 लाख 50 हजार रुपये की लागत से तैयार किया गया था। काफी मेहनत से बने इस रावण को जहां तकनीकी दिक्कतों के चलते कानपुर से बुलाई गई विशेष क्रेन की मदद से खड़ा किया गया वहीं, इसे बारिश के चलते जला भी नहीं सके।
जब राम रावण युद्ध के बाद रावण दहन की बारी आई तो रावण को क्रेन की मदद से धीरे-धीरे नीचे जमीन पर लिटाया गया और फिर उसमें आग लगाई गई। प्रदेश का सबसे ऊंचा रावण जिलेभर के लोगों के लिए आकर्षक का केंद्र था, लेकिन वह इसे जलता नहीं देख सके और दशहरे का सारा मजा किरकिरा हो गया। रावण दहन देखने के लिए लोग बारिश में भी खड़े रहे, लेकिन भीग जाने के चलते रावण को जलाने में काफी मुश्किलों की सामना करना पड़ा, बाद में इसे जमीन पर लिटाकर पेट्रोल की सहायता से जलाया गया। रावण में आतिशबाजी के लिए अलग से पटाखे लगाए गए थे, जिससे हादसा होने की आंशका भी थी, हालांकि राहत की बात ये रही किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.