ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

लालू प्रसाद-तेजस्वी यादव के एक और विधायक की गई विधानसभा सदस्यता, इस मामले में की गई कार्रवाई

मुजफ्फरपुर।  बिहार विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी यानी राजद के लिए एक और बुरी खबर है। उसके एक और विधायक की सदस्यता को समाप्त कर दिया गया है। इस संबंध में बिहार विधानसभा सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर की कुढ़नी विधानसभा सीट से विधायक व पूर्व राज्यसभा सदस्य अनिल कुमार सहनी के खिलाफ की गई है। उनको अवकाश एवं यात्रा भत्ता यानी एलटीसी घोटाले में दोपी करार दिया गया था। इसके बाद ही यह कार्रवाई की गई है।

अब उपचुनाव कराए जाएंगे

बिहार विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की ओर से दोषी करार दिए जाने के बाद जनप्रतिनिधित्व कानून की विभिन्न धाराओं के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस तरह से देखा जाए तो मोकामा के बाद एक और सीट राजद को गंवानी पड़ी है। तीन नवंबर को गोपालगंज विधानसभा सीट के साथ ही मोकामा में वोट डाले जाएंगे। अनिल सहनी की सदस्यता समाप्त होने के बाद अब कुढ़नी विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव कराए जाएंगे।

चुनाव से पहले राजद में शामिल हुए थे

विदत हो कि वर्ष 2013 में सीबीआइ ने अवकाश एवं यात्रा भत्ता के घोटाले से संबंधित एक केस दर्ज किया था। उस समय अनिल कुमार सहनी जदयू की ओर से राज्यसभा सदस्य बनाए गए थे। अनियमितता की बात सामने आने के बाद उनकी दूरी जदयू से बढ़ गई। वर्ष 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने राजद का दामन थाम लिया था। जहां से उन्होंने भाजपा प्रत्याशी केदार गुप्ता को परास्त कर विधायकी हासिल कर ली थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने बिना यात्रा किए ही लाखों रुपये के भत्ते प्राप्त कर लिए। सीबीआइ से पहले सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने इस मामले की जांच की थी।

पहले भी विवादों से रहा है नाता

अनिल सहनी के बारे में यह भी कहा जाता है कि वर्ष 2005 के चुनाव के दौरान वे जदयू प्रत्याशी के लिए प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए रुपये बांटने का आरोप उनपर लगा। जब उनकी गाड़ी को जांच के लिए निर्वाचन आयोग के तत्कालीन सलाहकार केजे राव ने उनकी गाड़ी रोकी को रुपये को बंडल को उन्होंने नाले में फेंक दिया था। बाद में नाले से चार लाख रुपये निकाले गए थे। उसके बाद चुनाव आचार संहित का मुकदमा उनपर कायम किया गया था।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.