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बर्न यूनिट अब डायलिसिस सेंटर, मेडिसिन में इलाज की मजबूरी

महासमुंद: महासमुंद शासकीय मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल में बर्न केसेस में मरीजों की विशेष सुविधा के लिए दो साल पहले बर्न यूनिट तैयार किया गया था। हाल ही में इस यूनिट को डायलिसिस सेंटर के तौर पर तब्दील कर दिया गया है। इसके चलते अब बर्न केसेस में मरीजों का उपचार मेडिसिन विभाग के मेल व फीमेल वार्ड में ही किया जाता है। इसके चलते विशेष वार्ड में मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं इस वार्ड में नहीं मिल पातीं और संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। इस आधी-अधूरी सुविधा के बीच अब दीपावली पर आने वाले बर्न केस के उपचार की मुकम्मल तैयारी का निर्देश दिया गया है।बता दें कि मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण से पहले ही बर्न यूनिट वार्ड का निर्माण किया गया था। यह यूनिट लगभग 10 बेड का था, जिसमें बर्न केसेस से संबंधित सभी सुविधाएं थीं। इसे तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने डायलिसिस सेंटर में तब्दील कर दिया गया था। यहां से किडनी रोग से ग्रसित मरीज रोजाना 24 घंटे डायलिसिस की सेवा का लाभ ले रहे हैं।24 घंटे अलर्ट रहेगी टीम, लगाई ड्यूटीदीपावली को देखते हुए 24 घंटे उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने दिए हैं। कहा कि पर्व के दौरान अस्पताल में 24 घंटे मरीजों को चिकित्सीय सुविधा का लाभ मिलेगा। सभी विभाग के चिकित्सक और स्टाफ ड्यूटी पर रहेंगे।अनुमति के बाद ही की गई है तब्दीलीअस्पताल सलाहकार डॉ. निखिल गोस्वामी ने बताया कि 2020 में बर्न यूनिट वार्ड तैयार किया गया था। राष्ट्रीय योजना के तहत डायलिसिस सेंटर शुरू करने के निर्देश पर विकल्प के तौर पर बर्न यूनिट को डायलिसिस सेंटर में तब्दील करने के लिए राज्य से अनुमति ली गई थी।बैक्टीरिया फ्री न होने से संक्रमण का खतराविशेष बर्न यूनिट वार्ड में आगजनी की घटना के शिकार हुए गंभीर मरीजों को भी इसका लाभ मिलता है। इस वार्ड के लिए विशेष प्रशिक्षित स्टाफ के साथ बैक्टीरिया फ्री एरिया व अन्य विशेष सुविधाओं से लैस होता है। बता दें कि आगजनी के शिकार मरीजों को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए बैक्टीरिया फ्री एरिया में ही इलाज किया जाता है। ऐसे में मेडिसिन विभाग के जनरल वार्ड में गंभीर मरीजों का इलाज कर पाना संभव नहीं होता है। हालांकि महासमुंद में बर्न केसेस कम ही आते हैं। वर्तमान में मेडिसिन वार्ड में ही पर्दे लगाकर मेल व फीमेल वार्ड में मरीज का उपचार किया जाता है।

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