ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

कार्यशाला में रजूर के किसान ने जैविक खेती के गुर सीखाए

खरगोन: सीएम ने वर्चुअली संबोधित किया, गोवर्धन पूजा को पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती के रूप में मनाया गोवर्धन पूजा को पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती के रूप में मनाया गया। बुधवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती विषय पर कार्यशाला हुई। कार्यशाला को वर्चुअली रूप में कलेक्टर वीसी कक्ष व जनपद स्तर पर भी इन कार्यक्रम को जन अभियान परिषद की नवांकुर संस्थाओं और सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों ने भी सहभागिता की है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि आने वाला समय जैविक खेती का है। हर गांव में किसान खेती को अपनाएं।कार्यक्रम मंे जिले के किसानों ने अपने अनुभव व खेती से लाभ की जानकारियां दी। वीसी में जिला पंचायत सीईओ ज्योति शर्मा भी शामिल हुई। खरगोन जनपद में रजूर गांव के रामचंद्र पाटीदार अपनी भूमि की 10 वर्ष पूर्व उर्वरा शक्ति क्षीण हो जाने के बाद निराश हो चुका था। लेकिन साहस, सोच और मिट्टी में जीवांश के प्रबंधन से भूमि की उर्वरा शक्ति पुनः प्राप्त कर ली है। अब रामचंद्र पाटीदार अमरूद की खेती से लाखों की उपज कर अलावा अदरक की खेती भी कर रहा है। यह सब उसके लिए इतना आसान नही था।रामचंद्र ने बताया कि खेती से वह केवल अनाज या फल सब्जी ही ले जाते हैं। बाकी फसल से निकला अन्य भाग भूमि में ही छोड़ देते हैं। इसके अलावा खेत में से निकले खरपतवार को उखाड़ कर उसकी मेड़ बनाकर खेती में जीवांश या उर्वरा शक्ति लौटाने पर हमेशा विचार करते हैं। साथ ही वे रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग बिल्कुल छोड़ चुके हैं। रामचंद्र ने बताया कि मिट्टी में जीवांश की उपलब्धता के लिए वह न केवल वेस्टडिकम्पोजर, गोकृपा अमृतं, जीवामृत, बीजामृत बल्कि इन सब से अलग खेत से केवल अनाज या फल ले जाने का काम करते हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.