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सरपंच के चुनाव में छाए 10वीं पास, 52.91% के हाथ में गांव की सरकार

चंडीगढ़: ग्रेजुएट या अधिक पढ़े-लिखों की चुनाव में दिलचस्पी कम, 4.11% सरपंच बनेप्रदेश में गांव की सरकार बनाने में सबसे ज्यादा रूचि 10वीं पास के लोग ही दिखा रहे हैं और वे इसमें सफल भी हुए हैं। प्रदेश के 18 जिलों में अब तक 5,276 सरपंचों पदों के चुनाव के नतीजों में 52.91 फीसदी 10वीं पास सफल हुए हैं। यानी, 2,792 सरपंच बने हैं।नामांकन से स्पष्ट हुआ है कि सियासत में भी दसवीं पास लोग ही ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं, क्योंकि सर्वाधिक 12,253 नामांकन भी इसी शैक्षणिक योग्यता वालों ने किया है। वहीं, इसके उलट ग्रेजुएट या इससे बड़ी डिग्री हासिल करने वालों में से महज 4.11 प्रतिशत ही चुनाव जीतने में सफल हो पाए हैं। हालांकि, इस योग्यता के लोगों ने चुनाव में दिलचस्पी भी कम ही दिखाई।एससी के 25.66% तो बीसीसे 12.90 प्रतिशत बने सरपंचसरपंचों के चुनाव में बात यदि आरक्षण की करें तो एससी कैटेगिरी के 25.66 प्रतिशत प्रतिनिधि सरपंच बनने में सफल हुए हैं। बीसी और ओबीसी से 12.90 प्रतिशत गांव के मुखिया बने हैं। वहीं, सामान्य वर्ग के 61.42 प्रतिशत लोगों ने सरपंच पद पर जीतने में सफलता हासिल की है।ग्रेजुएट या इससे अधिक पढ़े-लिखे 888 लोगों ने ही नामांकन पत्र भरे थे। इसी तरह, प्रदेश में इस बार सरपंचों की औसत आयु 2016 में हुए चुनाव में जीतने वाले प्रत्याशियों की औसत उम्र से ज्यादा हो गई है। पहले प्रदेश में सरपंचों की औसत आयु 36.1 थी, परंतु इस बार 18 जिलों में चुने गए सरपंचों की औसत उम्र 37 वर्ष हो गई है।

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