ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

भाषा और धर्म के आधार पर देश को बांटा जा रहा : कमलनाथ

ग्वालियर| कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यहां रविवार को कहा कि “हमारे बुजुर्गो ने अपना जीवन जिस संस्कृति में रहकर काटा है, वही संस्कृति आज खतरे में है। भाषा के आधार पर, धर्म के आधार पर देश को बांटा जा रहा है।” संत रविदास की जयंती पर ग्वालियर में आयोजित कार्यक्रम में कमलनाथ ने कहा, “संत रविदास के गुरु कबीर दास थे, उनकी जयंती पर हमें उनका संदेश याद रखना चाहिए। सबसे आवश्यक बात यह है कि कोई व्यक्ति छोटा या बड़ा जन्म से नहीं होता, अपने कर्म से होता है। संत रविदास ने सामाजिक न्याय का संदेश दिया था, समाज को एकजुट रखने का संदेश दिया था।”

कमलनाथ ने कहा, “हमारे बुजुर्गो ने अपना जीवन जिस संस्कृति में रहकर काटा है, वही संस्कृति आज खतरे में है। भाषा के आधार पर, धर्म के आधार पर देश को बांटा जा रहा है। लोकतंत्र में चुनाव आते रहते हैं, मगर सात महीने बाद जो चुनाव होना है, उसमें किसी प्रत्याशी या पार्टी की जीत-हार का सवाल नहीं है, हमारे देश के भविष्य का सवाल है। आज संत रविदास जयंती के दिन हम इसी संस्कृति की रक्षा करने का संकल्प लें।”

कमलनाथ ने कहा, “आज हम पूज्य रविदास की जयंती पर यह संकल्प लें कि हम इस संस्कृति के रक्षक बनेंगे। बाबासाहेब आंबेडकर ने देश को ऐसा संविधान दिया, जो पूरे विश्व में मशहूर है, कई देशों ने हमारे संविधान का अनुसरण भी किया है। परंतु यही संविधान यदि गलत हाथों में चला जाए तो देश का भविष्य क्या होगा? आज हमें यह सोचना होगा कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कैसा प्रदेश और कैसा देश सौंपना चाहते हैं?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा, “हम संकल्प लें कि आज हमारा पहला लक्ष्य कोई पार्टी नहीं, कोई उम्मीदवार नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और अपने संविधान को सुरक्षित रखना है। देश और प्रदेश की तस्वीर अपने सामने रखिएगा, किस प्रकार धर्म के नाम पर लोगों को बांटा जा रहा है, जातियों के नाम पर हम सबको आपस में बांटा जा रहा है, परंतु हम यदि एकजुट रहेंगे तो एकता की आवाज में बहुत ताकत होती है।”

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.