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भारतीय क्रिकेट में बदलाव के वादे के साथ खत्म हुआ डब्ल्यूपीएल

महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) ने लुभावना पदार्पण किया और भारत की उभरती हुई महिला क्रिकेटरों के उज्ज्वल भविष्य के वादे के साथ खत्म हुआ लेकिन पहले सत्र के बाद सुधार की काफी गुंजाइश दिखती है। डब्ल्यूपीएल मुंबई के दो स्टेडियम में खेला गया, जिसमें दुनिया की कुछ सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों ने खास प्रदर्शन किया। बाएं हाथ की स्पिनर साइका इशाक को छोड़ दें तो इतनी स्थानीय प्रतिभाएं सामने नहीं आई, जितनी उम्मीद की जा रही थी।

पांच टीमों की प्रतियोगिता रविवार को खत्म हुई जिसमें मुंबई इंडियंस की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने अपनी टीम को खिताब दिलाया। फाइनल में उनका सामना आस्ट्रेलियाई महान क्रिकेटर मेग लैनिंग की कप्तानी वाली टीम दिल्ली कैपिटल्स से था। मुंबई इंडियंस की इशाक ने 15 विकेट झटके, उनके अलावा आरसीबी की श्रेयंका पाटिल और कनिका आहुजा ने बड़े मंच अपनी छाप छोड़ी, लेकिन भारतीय घरेलू सर्किट और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाडियों के बीच अंतर स्पष्ट दिखाई दिया।

हरमनप्रीत ने स्वीकार किया कि भारतीय खिलाड़ियों को ज्यादा भूमिकाएं और खेलने के मौके नहीं मिले। हालांकि हरमनप्रीत ने उम्मीद जताई कि युवा और ‘अनकैप्ड’ भारतीय खिलाड़ी अपने अनुभव से और अधिक समझदार होंगी और वे समझ गई होंगी कि उन्हें विदेशी खिलाडि़यों और खुद के बीच अंतर को कम करने के लिए क्या करने की जरूरत है। दिल्ली के मुख्य कोच जोनाथन बैटी ने भारतीय युवा खिलाडि़यों को दूसरे सत्र के लिए अपने खेल और फिटनेस पर काम करने का संदेश दिया।

स्मृति मंधाना की अगुआई वाली आरसीबी को लगातार पांच मैचो में हार का सामना करना पड़ा। इस भारतीय खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि उन्हें बड़े कद की और उनसे ज्यादा अनुभवी खिलाडि़यों से भरी टीम की अगुआई करने में मुश्किल का सामना करना पड़ा। वह खुद भी आरसीबी के लिए बल्ले से योगदान नहीं कर सकीं जिसमें एलिस पैरी, हीथर नाइट, सोफी डेविने, मेगान शट और रेणुका ¨सह जैसी खिलाड़ी मौजूद हैं। हीली और सोफी एक्लेस्टन जैसी खिलाडि़यों ने इच्छा जताई कि अगले सत्र से ‘होम एंड अवे’ मैचों का आयोजन किया जाए, जिससे घरेलू प्रशंसकों का फायदा मिले।

 

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