मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान खूब बजा अश्लील गाने जम के थिरके लोग
एक और जहां पूरे झारखंड प्रदेश में भोजपुरी मगही आदि भाषाओं को लेकर जम के विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रही हैं। वहीं दूसरी और रामगढ़ जिले समेत कई अन्य जिलों में मां
शारदे विद्यादायनी की प्रतिमा विसर्जन के दौरान लगभग सभी जगहों पर भोजपुरी की अश्लील संगितों पर जम कर हिन्दू समुदाय के लोग डांस कर धमाल मचाया। देवी की पूजा पूरे विधि विधान से किया जाता हैं। उसी देवी की अंतिम विदाई के दौरान अश्लील संगितों का प्रयोग करना गलत हैं।
जी हां, कुछ ऐसी ही स्थिति है शहर-गांव में बजने वाले गीत-संगीत और इसकी डिमांड का। वर्तमान युवा पीढ़ी में पुरानी अवधारणाएं अब करवट लेने लगी है। शादी-विवाह पूजा आदि का सीजन आते ही युवाओं को गीत-संगीत पर थिरकने का मौका मिल जाता है। लेकिन, समय के साथ परंपरागत बैंड-बाजे की जगह कानफाड़ू डीजे ने ले ली है। कुछ समय पहले तक शहर में ही डीजे का प्रचलन बढ़ा था। लेकिन, अब गांव-देहात में भी डीजे की डिमांड बढ़ गई है। गांव की गलियों में भी अब डीजे की धुन पर युवा थिरक रहे हैं। डीजे की बोल जितनी समझ में नहीं आती उससे अधिक इसकी तेज आवाज के चलते शरीर और धड़कन में कंपन महसूस होती है। इस कानफाड़ू और सेहत बिगाड़ने वाले डीजे का आकर्षण युवाओं और बच्चों में अधिक है।
हिन्दू समाज पार्टी के राष्टीय उपाध्यक्ष दीपक सिसोदिया ने की कड़ी निंदा
हिन्दू समाज पार्टी के राष्टीय उपाध्यक्ष दीपक सिसोदिया प्रेस बयान जारी करते हुवे बताया की हिन्दू शास्त्रों में कही नही बतलाया गया हैं की मूर्ति विसर्जन के दौरान बाजे गाजे का प्रयोग किया जाए कियुकी मां देवी को जब हम पूजा के बाद पवित्र गंगा में विसर्जित करते हैं तो आंखे नम होनी चाहिए कारण यह हैं हम अपनी मां से उस वक्त बिछड़ते हैं। और फिर उस मां से मिलने के लिए सालों भर इंतजार करना होता हैं। परंतु आज के युग के युवा अपनी संस्कृति भूलते जा रहे हैं। पूजा पंडालों या फिर प्रतिमा विसर्जन। के दौरान अश्लील भोजपुरी गानों का का मैं कड़ी निंदा करता हूं।