ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

पगड़ी में लगाई जाने वाली पाग के आकार का होगा बुरहानपुर का गुरु गोविंद सिंह संग्रहालय

 बुरहानपुर । एतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासतों से देश और दुनिया के लोगों को परिचित कराने का बेहतर माध्यम संग्रहालय होते हैं। इनमें रखी जाने वाली प्राचीन वस्तुएं उस दौर की समृद्धता और संस्कृति से हमें परिचित कराती हैं। इसी उद्देश्य से जिले में बहादरपुर गांव के पास चार साल पहले गुरु गोविंद सिंह संग्रहालय के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी।

17 करोड़ की लागत से 5 एकड़ भूमि में होगा तैयार

इस भवन की ड्राइंग डिजाइन सिक्ख समुदाय द्वारा पगड़ी में लगाई जाने वाली पाग के आकार की रखी गई है। दुखद पहलू है कि 17 करोड़ की लागत से करीब पांच एकड़ भूमि पर बनने वाला यह संग्रहालय अब तक बन कर तैयार नहीं हो पाया है।

जल्द पूरा होगा निर्माण कार्य

निर्माण कार्य पुरातत्व और पर्यटन विभाग की देखरेख में बेहद धीमी गति से चल रहा है। गुरुवार को विश्व संग्रहालय दिवस मनाया जा रहा है। नगर के इतिहासकारों का कहना है कि इसका निर्माण जल्द पूरा कराया जाना चाहिए। ज्ञात हो कि पूर्व में प्रस्तावित भूमि में अतिक्रमण और विवाद की स्थिति बनने के कारण करीब दो साल मामला अटका रहा है। अब जाकर निर्माण की सभी बाधाएं दूर हो सकी हैं।

वस्तुएं ही नहीं सभ्यता भी शामिल हो

नगर के इतिहासकार व जिला पुरातत्व एवं पर्यटन परिषद (डीएटीसी) के सदस्य होशंग हवलदार का मानना है कि संग्रहालय में सिर्फ वस्तुएं ही नहीं रखी जानी चाहिए। इसमें नगर की संस्कृति और सभ्यता को भी शामिल किया जाना चाहिए। यह नगर हजारों साल पुराना है।

कच्चे मकानों से हमने किस तरह पक्के मकान बनाए और कितनी मंजिल से प्रारंभ किए, जल संग्रह किस तरह किया, पूर्व के हथियार बरछी, तीर, भाले, कौड़ी, पाई, रुपया सहित अन्य वस्तुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। संग्रहालय का निर्माण पूर्ण होने के बाद डीएटीसी के माध्यम से बात रखी जाएगी।

फरवरी माह से भूमि हमें उपलब्ध कराई गई है। दो माह में भवन का निर्माण प्लिंथ लेवल तक पहुंच गया है। उम्मीद है इस साल के अंत तक निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसकी ड्राइंग डिजाइन बेहद आकर्षक है। – नीलेश सेंगले, इंजीनियर पर्यटन विभाग।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.