ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

मणिपुर में फूटा दरिदों के खिलाफ गुस्सा, महिलाओं की न्यूड परेड के आरोपी का घर फूंका

 मणिपुर में भीड़ द्वारा दो महिलाओं को नंगा करके घुमाने का वीडियो वायरल होने से बवाल मचा हुआ है। वीडियो सामने आने के दो दिन बाद मुख्य आरोपी के घर को शुक्रवार को उपद्रवियों ने जला दिया। वायरल वीडियो में मणिपुर के कांगपोकपी जिले में महिलाओं को भीड़ द्वारा नग्न अवस्था में घुमाते हुए दिखाया गया है। आरोप है कि महिलाओं का गैंगरेप भी किया गया।

कांगपोकपी जिले के एक गांव में हुई यह घटना 3 मई को जातीय हिंसा भड़कने के एक दिन बाद हुई। हालांकि इसके फुटेज बुधवार को ही सामने आए। सोशल मीडिया में तेजी से फैल गया। सरकार के आदेश के बाद इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया।

यह घटना 4 मई को हुई थी। शिकायत 18 मई को दर्ज की गई थी। इसे 21 जून को पुलिस स्टेशन में भेज दिया गया था। और सोशल मीडिया पर नाराजगी के बाद पहली गिरफ्तारी गुरुवार को हुई। कई मायनों में गिरफ्तारी को अंजाम देने में मणिपुर सरकार की गति ने उनकी कार्रवाई की पूरी कमी को उजागर कर दिया। एक के बाद एक चूक पर चुप्पी साध ली गई। 77 दिनों तक इस पर पर्दा डालने का प्रयास किया। पहली शिकायत 18 मई को काकंगपोकपी जिले के सैकुल पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। शिकायत विस्तृत थी और इसमें घातक हथियार के साथ डकैती, अपहरण, हमला, बलात्कार और हत्या की धाराएं शामिल थीं। मामले को नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित करने में पुलिस को एक महीने और तीन दिन लग गए। 21 जून को मामला नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन के पास आया। ऐसा लगता है कि एफआईआर में देरी की बात स्वीकार की गई है। एफआईआर में ग्राम प्रधान के हवाले से बताया गया है कि भीड़ ने लूटपाट और अन्य घटनाओं को अंजाम दिया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.