ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

मणिपुर हिंसा पर शोर-शराबे के बीच लोकसभा में दो बिल पास, सातवें दिन भी हंगामा जारी

लोकसभा में बृहस्पतिवार को भी पिछले कुछ दिन की तरह मणिपुर मुद्दे को लेकर गतिरोध बरकरार रहा और सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच ही सरकार ने कारोबार सुगमता को बढ़ाने के उद्देश्य वाले विधेयक समेत दो विधेयक पारित कराए।

कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के अन्य घटक दल मानसून सत्र के पहले दिन से ही मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद में वक्तव्य देने और चर्चा कराए जाने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर हंगामे के कारण दोनों सदनों में कार्यवाही बाधित रही है। निचले सदन की कार्यवाही जब दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न तीन बजे आरंभ हुई तो विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे।

इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आसन से आग्रह किया कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने कागज फाड़कर आसन की ओर फेंके हैं और जिन्होंने ऐसा किया है उनके नाम का उल्लेख करना चाहिए। पीठासीन सभापति किरीट सोलंकी ने कहा कि कागज फाड़कर फेंकना उचित व्यवहार नहीं है और संसद का अपमान भी है। उनका कहना था, ‘‘इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए।”

सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की मांग उठाने की कोशिश की तो सोलंकी ने नियम 198 के तहत प्रावधान को पढ़ा। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को सदन की अनुमति मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष तीन दिन से दस दिन के अंदर इसे सदन में चर्चा के लिए लेने की तारीख का निर्णय कर सकते हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.