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मंगलादित्य योग के महासंयोग में महालय श्राद्ध पक्ष होगा शुरू

ग्वालियर। पितरों का श्रद्धा तर्पण करने का पितृपक्ष तथा कनागत 29 सितंबर से प्रारंभ होगा। पूर्णिमा से शुरू होने वाला यह पितृपक्ष सर्व पितृ अमावस्या शनिचरी अमावस्या 14 अक्टूबर को पूर्ण होगा। 16 दिनों तक होने वाले श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण भोज के साथ, पशु पक्षियों की सेवा भोजन के साथ पितरों की याद में पेड़ पौधों को लगाने का भी विधान है। क्योंकि पितरों को नदी, तालाब और जलाशय में पितृ तर्पण, पिंडदान देने की परंपरा प्राकृतिक संरक्षण से जुड़ी है, इस बार श्राद्ध पक्ष पूरे 16 दिन का रहेगा। वहीं पंचक नक्षत्र में श्रद्धापक्ष प्रारंभ होने से श्राद्धकर्ता को पांच गुना शुभ फल प्रदान करेगा।

बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डॉं सतीश सोनी के अनुसार श्राद्ध पक्ष का आरंभ 29 सितंबर शुक्रवार के दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, वृद्धि योग वव करण तथा मीन राशि के चंद्रमा में शुरू होगा। इसके साथ ही श्रद्धा आरंभ में सूर्य, मंगल के कन्या राशि पर गोचर होने का साक्षी रहेगा। वहीं 29 तारीख की मध्य रात्रि में अमृत सिद्धि योग का संयोग बनेगा। जो अगले दिन सुबह तक रहेगा।अमृत सिद्धि योग के संयोग में पितरों के निमित्त किया गया। तर्पण व पिंडदान उन्हें अमृत प्रदान करेगा।

श्राद्ध पक्ष में सूर्य, चंद्र का सम सप्तक दृष्टि संबंध से कुंजर छाया योग

डां सोनी ने बताया। ज्योतिष ग्रंथ निर्णय सिंधु व अन्य ग्रंथौ के साथ वैज्ञानिक पक्ष को देखने से इस बार श्राद्ध पक्ष में पूर्णिमा और अमावस्या पर कुंजर छाया योग बनेगा। जो की अद्भुत होगा। यह योग केंद्र की गणना से बनेगा। वहीं कर्म पुराण में बताया गया है। कि पितृपक्ष में शरीर, द्रव्य, स्त्री, भूमि, मंत्र शुद्ध होना चाहिए। तथा इन दिनों अपने पितरों को तुलसी अवश्य चढ़ाने चाहिए। क्योंकि पितर तुलसी की गंध से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

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