अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वान हुए सम्मिलित
संस्कृत भाषा के समग्र विकास के लिए हमें दृढ़ संकल्पित होना होगा-प्रो.शशिनाथ झा
किशोर कुमार ब्यूरो
मधुबनी-केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली द्वारा संचालित लगमा स्थित जगदीश नारायण ब्रह्मचर्याश्रम आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। गुरुवार को संगोष्ठी के दुसरे दिन अध्यक्षता करते हुए कामेश्वर दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.शशिनाथ झा ने कहा कि संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए समग्र रूप से आधुनिकता से जोड़कर वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए हमें दृढ़ संकल्पित होना होगा। आधुनिकता के दौर में लोग क्रमशः फैशन के तौर पर भी संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
मुख्यातिथि पूर्व कुलपति प्रो.देवनारायण झा ने सामाजिक एकता सम्पादित करने के लिए संस्कृत के अध्यन पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि प्रो.लक्ष्मीनाथा झा ने कहा कि शास्त्रों के संरक्षण में इस तरह की संगोष्ठी को मिल का पत्थर बताया । सारस्वत अतिथि डॉ.विनोदानंद झा ने संस्कृत के ग्रन्थों के संरक्षण व संवर्धन पर बल दिया।
वहीं संगोष्ठी में आगत अतिथियों को पाग-चादर एवं पुष्पगुच्छ से महाविद्यालय के प्राचार्य विद्यावाचस्पति डॉ.सदानंद झा ने सम्मान करते हुए विधान पार्षद डॉ.मदन मोहन झा से बिहार में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का एक परिसर विद्यापीठ के रूप में खोलवाने हेतु ज्ञापन सौंपा। डॉ.मदन मोहन झा ने अपने संबोधन में लगमा संस्कृत महाविद्यालय के विकास के लिए हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया ।
लगमा आश्रम के महंथ स्वामी कृष्ण मोहन दास ब्रह्मचारी ने कहा कि इस तरह के संगोष्ठी आयोजित होने से अध्यनरत छात्रों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि उत्पन्न होगी।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ.कृष्णमोहन झा के वैदिक मंगलाचरण तथा डॉ.सोनी कुमारी के जय जय भैरवि गीत से हुई । संस्था परिचय रुपेश कुमार झा ने किया। मंच संचालन साहित्य विभाग के प्राध्यापक डॉ.रमेश कुमार झा तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक डॉ.राघव कुमार झा ने किया ।
दो द्विवसीय संगोष्ठी में नेपाल से डा.विजय चौधरी, दिल्ली विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो.भवेन्द्र झा, प्रो.देवनारायण झा, जयपुर के पूर्व निदेशक प्रो.अर्कनाथ चौधरी, प्रो.सुरेश्वर झा, प्रो.शुभकांत चौधरी, प्रो.इन्द्रनाथ झा,प्रो.जयशंकर झा ,प्रो.कृष्णकांत झा सहित दर्जनों शोधार्थी ने अपने अपने विचार प्रकट किए।मौके पर डॉ.कृष्णकुमार मिश्र, डॉ.सुशील चौधरी,डॉ.नागेन्द्र झा, दीपेश चौधरी, संगीत कुमार झा,मनीष कुमार, अंकित कुमार, अनुराधा कुमारी,अटल बिहारी चौधरी आदि उपस्थित थे ।
शान्तिपाठ से कार्यक्रम की सम्पूर्ति हुई ।