दादी जानकी ने पूरी दुनिया भर में मानवता का बीज बोया, नारी को शक्ति स्वरूपा बनाया द्वितीय पुण्य तिथि पर जुटे हजारों लोग, शक्ति स्तम्भ पर पुष्पांजलि कर दी श्रद्धांजलि
आबू रोड (राजस्थान) पूरी दुनिया में एक सदी तक मानवता का बीज बोने वाली ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन में संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी का दूसरा पुण्य तिथि वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी, अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मोहिनी, राजयोगिनी बीके जयन्ति, संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी, महासचिव बीके निर्वेर, अतिरिक्त महा सचिव बीके बृजमोहन, मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष बीके करूणा, कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय समेत वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दादी के समाधि स्थल शक्ति स्तम्भ पर कुछ मिनट मौन रहकर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि दादी का जीवन हमेशा ही मानवता की सेवा में गुजरा। उन्होंने ज्ञान, योग की शक्ति से पश्चिमी देशों के लोगों को भारतीय संस्कृति और मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। वे हमेशा प्रकृति के साथ लोगों की आर्थिक और सामाजिक रीति से मदद करती रही। वे त्याग और तपस्या की मूर्ति थी। श्रद्धांजलि सभा में संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयेागिनी न्यूयार्क की बीके मोहिनी तथा राजयोगिनी बीके जयन्ति ने कहा कि दादी के जीवन से हमेशा हमने सीखा है। वे शक्ति की पुंज थी। जो भी उनके सम्पर्क में आता वो हमेशा ही उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव के ओर बढ़ चलता था।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के महासचिब बीके निर्वेर ने कहा कि दादी असीम उर्जा की श्रोत थी। वे चाहे दिन हो या रात हमेशा ही अथक रही। जब तक वे दूसरोंं को ज्ञान या उसे श्रेष्ठ कर्म करने के लिए प्रेरित नहीं करती तब तक उन्हेंं आराम नहीं मिलता। अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन ने कहा कि दादी हमेशा ही युवाओं की तरह रही। उनकी सोच, उनके अन्दर दिव्यता का प्रवाह था। वे जिधर भी जाती उधर मूल्यों का सुगन्ध बह उठती थी।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयेागिनी बीक मुन्नी, दादी जानकी की व्यक्तिगत सचिव रही बीके हंसा, मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष बीके करूणा, कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय समेत कई लोगों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये।