महिला सशक्तिकरण और लेट्स इन्सपायर बिहार।
महिलाओं को लेकर लेट्स इन्सपायर बिहार की टीम और आईपीएस श्री विकास वैभव काफ़ी सजग है। भारत की महिलाओं ने विगत कुछ वर्षों में अपना परचम लहराया है। बिहार पर कुछ तथ्य रखने के पहले मैँ यूनाइटेड किंगडम की महिलाओं के विषय में कहूँगा। 1832 में यूनाइटेड किंगडम में महिलाओं को सभी तरह के मतदान के अधिकारों से वंचित किया जाता रहा। 19वीं सदी में महिलाओं के मतदान के अधिकार का सवाल एक बड़ा और ज्वलन्त मुद्दा बन गया। 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों तक महिलाओं ने राष्ट्रीय चुनाव में वोट देने का अधिकार प्राप्त कर लिया था। ब्रिटेन में महिलाओं के मताधिकार की पहली जन मताधिकार याचिका 1860 से 1918 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के पारित होने तक की यात्रा बेहद सुखद अनुभव दे जाती है। न्यूजीलैंड 1893, आस्ट्रेलिया 1902, फिनलैंड 1906, नार्वे 1913 में यह संघर्ष बेहद तीव्र था। 1914 से 1939 की अवधि में 28 अतिरिक्त देशों में महिलाओं ने तो पुरुषों के समान मताधिकार का राष्ट्रीय चुनावों में अधिकार प्राप्त कर लिया था। भारत में महिलाओं के लिए पूर्ण मताधिकार 1949 में संविधान द्वारा पेश किया गया। मतलब भारत की महिलाएं लगभग विश्व के साथ चलते रहीं, पर सम्पूर्ण श्रेय ब्रिटेन की उन महिलाओं को जाता है जो 1860 से 1918 तक कुल 58 वर्षों तक संघर्ष कर महिलाओं के लिए आदर्श बनी। अब हम बिहार की महिलाओं की बात करते है। बिहार में महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत है। सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं के लिए कई योजनाएं चलाई गई और लगभग 8 प्रतिशत शिक्षा में सुधार हुआ। सरकार को इसके लिए हार्दिक शुभकामनाएं,पर अभी भी 40 प्रतिशत महिलाओं को शिक्षित होना अभी बाकि है। बिहार में पांच में से तीन महिलाएं एनीमिक हैं। सफल नारी सशक्तिकरण की हज़ारों योजनाओं के बावजूद बिहार में बेटियों की संख्या में निरन्तर कमी होते जा रही हैं। पाचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट से जाहिर है कि राज्य में प्रति हजार नवजात लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या में 26 फीसदी की गिरावट हुई है। पांच साल पहले यानी 2015-16 के चौथे सर्वेक्षण में प्रति एक हजार लड़के पर लड़कियों की संख्या जहां 934 थी, 2019-20 में वह घटकर 908 हो गई। कुछ सुखद पहलु राजनीति से देखने को मिल रही। सत्ता में महिलाओं की सीधी भागीदारी में बिहार पहला ऐसा राज्य है, जहां पंचायत और शहरी निकायों में महिलाओं के लिए पचास फीसदी आरक्षण दिया जाता है। आरक्षण प्राप्त होने के कारण राजनीति कार्यों के निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। राज्य में वर्तमान समय में कुल 8442 मुखिया में पांच हजार महिला मुखिया है। इन सब के बावजूद बिहार में महिलाओं की सभी क्षेत्रों में भागीदारी का अनुपात अभी बहुत कम हैं। लेट्स इन्सपायर बिहार एक ऐसा प्लेटफार्म बन रहा जहाँ से महिलाएं अपनी आवाज़ समाज को दे सकती हैं। एक ससक्त और सजग महिला दूसरी लाचार और बेबस महिला की सहारा बन सकती है। दुःखद यह है कि बिहार में अभी भी महिलाएं संकुचित है और खुल कर पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर नहीं बढ़ रही। आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार अभियान से जुड़ कर जो विदूषी महिला है वो उन संकुचित महिलाओं को राह दिखा सकती हैं। इसके लिए लेट्स इन्सपायर बिहार एक उचित प्लेटफार्म है। ऐसे सुंदर और ऐतिहासिक प्लेटफार्म को सजाने और अपनी ऊर्जा से चहुओर फैलाने हेतु आईपीएस श्री विकास वैभव के हम सब कृतज्ञ है। आने वाली पीढ़ी जरूर इस बात को बिहार के इतिहास का मोड़ मानेगी। युवाओं के शुभचिंतक श्री विकास वैभव को हृदय से धन्यवाद।
जय हिंद जय बिहार