शिक्षकों को सरकार द्वारा षड्यंत्र कर किया जा रह मानसिक प्रताड़ित एवं आर्थिक शोषण : जयंत कु सिंह
औरंगाबाद। दुख है कि बिहार सरकार साजिश के तहत शिक्षकों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है की शिक्षक आर्थिक रूप से तंग हाल और बदहाल होकर अपने वेतन के लिए ही तड़पते रहे अन्य कोई मांगों के लिए आवाज न उठा सकें। इसका जीता जागता उदाहरण है कि राज्य भर में शिक्षकों का स्थानान्तरण तो लंबित है ही, वेतन भी मार्च महीने से लंबित है समग्र शिक्षा के मद से वेतन भुगतान होने वाले शिक्षकों का मार्च महीने का तो हो चुका है परंतु जीओवी के मद से भुगतान होने वाले शिक्षकों का मार्च महीने से ही बाकी है मतलब समग्र शिक्षा वाले शिक्षकों का वेतन 2 महीने का बाकी हो चुका तो वही जीओवी वाले शिक्षकों का 3 महीने का बाकी हो चुका। साथ ही साथ 15% वेतन वृद्धि के उपरांत अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 तक का अंतर वेतन भी बाकी है सभी शिक्षकों द्वारा इस मामले पर जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है नतीजा ऐसा है कि किसी शिक्षक के घर में बेटी बेटा बहन की शादी समस्या भी है तो कोई बीमारी से ग्रस्त है मतलब शिक्षक आर्थिक रूप से शोषण का शिकार हो रहे हैं। इस संदर्भ में जब राज्य से संबंध स्थापित किया तो वहां से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा है। ये बातें प्रदेश उपाध्यक्ष सह जिला अध्यक्ष औरंगाबाद, बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ जयंत कुमार सिंह ने कही एवं कहा की जिले के सभी प्रकार के शिक्षकों के बकाए वेतन एवं अन्य मद को लेकर मजबूरन संगठन द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि यदि 19 मई तक जिले में आवंटन उपलब्ध नहीं होता है तो जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष शिक्षा मंत्री का पुतला जलाकर आक्रोश व्यक्त किया जाएगा, अन्यथा शिक्षक अफसरशाही का शिकार होते रहेंगे।