ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

अब दूसरे राज्यों के उम्मीदवार भी मध्य प्रदेश में राज्य इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा दे सकेंगे

जबलपुर। हाई कोर्ट ने एमपीपीएससी को निर्देश दिए कि अपनी वेबसाइट में आवश्यक संशोधन करें, ताकि बाहरी उम्मीदवार अपने फार्म भर सकें।आवश्यकता महसूस होने पर फार्म भरने के लिए नई तारीख घोषित कर सात दिनों का समय दिया जाए। उसके बाद परीक्षा की नई तारीख घोषित की जाए।अब दूसरे राज्यों के उम्मीदवार भी मध्य प्रदेश में राज्य इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा दे सकेंगे। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के उम्मीदवारों को भी मध्य प्रदेश राज्य अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा 2021 में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस एसए धर्माधिकारी व जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने सभी संबंधितों को समान अवसर देने की व्यवस्था दी है।
याचिकाकर्ता गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश निवासी शीलेन्द्र सिंह व आजमगढ़ जिला निवासी वैभव कुमार सिंह की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी गई कि एमपीपीएससी के जरिए आगामी 22 मई को मध्य प्रदेश राज्य अभियांत्रिकी सेवा, स्टेट इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा-2021 आयोजित की जा रही है। इसमें याचिकाकर्ता को योग्यता होने के बावजूद इसलिए शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वे मध्य प्रदेश के मूलनिवासी नहीं हैं। एमपीपीएससी के इस नियम को असंवैधानिक बताते हुए अधिवक्ता संघी ने तर्क दिया कि संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को देश भर में कहीं भी अवसर की समानता का अधिकार दिया गया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.