दुबई में बिहार संवाद
आइए, मिलकर प्रेरित करें बिहार अभियान अंतर्गत यूएई अध्याय द्वारा शारजाह (दुबई) के एक होटल में अभियान का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संवाद का आयोजन किया गया जिसमें वर्षों से दुबई में निवास कर रहे अप्रवासी बिहारवासियों ने भाग लिया। अभियान के मुख्य संरक्षक विकास वैभव ने इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से जुड़े। अपने संबोधन में मुख्य संरक्षक ने सभी के प्रति अभियान से जुड़ने के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि स्वैच्छिक रूप से जुड़ रहे सभी बिहारवासियों के सहयोग से ही अभियान शनै: शनैः एक जन-अभियान का स्वरूप ग्रहण करने लगा है। उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान में लगभग 500 भिन्न-भिन्न अध्यायों में केवल व्हात्सएप समूहों के माध्यम से ही 37,000 से अधिक बिहारवासी अभियान के साथ भौतिक रूप से जुड़ चुके हैं, अन्य सोशल साइट्स पर तो संख्या लाखों में है और यह सब इसीलिए संभव हो रहा है चूंकि बिहारवासियों के अंतर्मन तक अभियान का संदेश पहुँच रहा है और जन-जन के मन में इस भाव को उत्पन्न कर रहा है कि बिहार के उज्ज्वलतम भविष्य का निर्माण पूर्वजों की दृष्टि को धारण करते हुए शिक्षा, समता तथा उद्यमिता के तीन मूल मंत्रों के ग्रहण सहित सकारात्मक योगदान के साथ ही संभव है । जातिवाद, सम्प्रदायवाद, लिंगभेद आदि लघु वादों में ग्रसित होकर आंतरिक उर्जा को व्यर्थ करने से सकारात्मक विकास संभव नहीं है । वांछित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आवश्यकता चिंता नहीं अपितु चिंतन की है, संघर्ष नहीं अपितु सहयोग की है । हमारे पूर्वजों की सोच बड़ी और व्यापक थी इसीलिए तो जब न आज की भांति मार्ग थे और न विकसित प्रौद्योगिकी और न सूचना तंत्र, तब ही हम व्यक्ति को व्यक्ति से जोड़ने में सक्षम हो सके थे और इस प्रकार राष्ट्र निर्माण कर सके थे जिससे अखंड भारत के साम्राज्य का निर्माण संभव हो सका था । हमारी सोच बड़ी थी इसीलिए तो हम ऐसे विश्वविद्यालयों को स्थापित कर सके थे जिनमें पढ़ने पूरे विश्व के व्यक्ति आते थे । जातियाँ तब भी थी परंतु जातिवाद आज की भांति हावी नहीं था अन्यथा नंद वंश जो समाज के सबसे निम्न वर्ग से आता था, भला शासक के रूप में स्वीकृत कैसे होता । उत्कृष्ट चिंतन के कारण ही जहाँ राजतंत्र के रूप में मगध का उदय हुआ, वहीं वैशाली में गणतंत्र की स्थापना भी हुई ।
यदि कालांतर में हमारा अपेक्षाकृत विकास नहीं हुआ तो इसका कारण कहीं न कहीं समय के साथ लघुवादों अथवा अतिवादों से ग्रसित होना ही रहा है । परिवर्तन के निमित्त आवश्यकता एक वैचारिक क्रांति की है जो युवाओं के मध्य प्रसारित हो और जो भविष्य निर्माण के निमित्त संगठित रूप में संकल्पित करे । हर परिवर्तन संभव है ! हमारे अभियान का उद्देश्य ही इतिहास के इस संदेश को बिहार के हर व्यक्ति तक पहुँचाना है ताकि हम अपनी उर्जा सही दिशा में लगाएं । जो सक्षम हैं उन्हें उनके सहयोग के लिए तत्पर होना होगा जिन्हें उसकी वास्तविक आवश्यकता है, तभी तो समतामूलक समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।
यूएई अध्याय से जुड़े भोजपुर जिले के मूल निवासी रवि चांद जी द्वारा आयोजित इस संवाद में बेगूसराय के मूल निवासी एवं प्रमुख वैश्विक उद्योगपति राम कैलाश महतो जी का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा । विशिष्ट वक्ता के रूप में शामिल होने के लिए अभियान के प्रमुख सदस्य लव कुमार सिंह जी बिहार के औरंगाबाद जिले से विशेष रूप से दुबई गए थे।