एमबीबीएस के बाद 10 फीसदी छात्र भी नहीं कर पा रहे पीजी आर्थो रेडियो, रेडियोथैरेपी, स्किन, सर्जरी सीटों की डिमांड ज्यादा
रायपुर: केवल 15 से 20 प्रतिशत छात्र ही विशेषज्ञता हासिल करने के लिए नीट पीजी की सीटें पा रहे हैं।प्रदेश में हर साल एक हजार से अधिक छात्र सरकारी और प्राइवेट कालेजों से एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर रहे हैं। लेकिन इनमें से केवल 15 से 20 प्रतिशत छात्र ही विशेषज्ञता हासिल करने के लिए नीट पीजी की सीटें पा रहे हैं। पीजी करना अब पहले की तुलना में बेहद कठिन हो गया है। पिछले कुछ साल में स्किन, रेडियोथैरेपी जैसे कोर्सेस अचानक डिमांड में आए हैं। वहीं परंपरागत तौर पर गायनी, पीडियाट्रिक जैसे कोर्स के प्रति एक सा रुझान देखा जा रहा है।डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) डॉ. विष्णु दत्त ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में करीब 300 पीजी की सीटें है। इसमें भी लगभग आधी सीटें अन्य राज्यों के छात्रों के लिए पहले से ही रिजर्व हैं। यही वजह है कि एमबीबीएस करने के बाद विशेषज्ञता हासिल करने मेडिकल स्टूडेंट्स को कड़ी चुनौती से गुजरना पड़ रहा है। बीते पांच साल के ट्रेंड के अनुसार छात्रों का रुझान आर्थो रेडियो, रेडियोथैरेपी, एनेस्थीसिया, मेडिसिन, चेस्ट एंड टीबी, स्किन, सर्जरी जैसे कोर्स के लिए ज्यादा बढ़ा है।वहीं कोरोना काल के बाद वायरोलॉजी, पैथालाजी, कम्युनिटी मेडिसिन जैसे कोर्स भी छात्रों की पहली पसंद बन रहे हैं। राज्य में हर साल 50 हजार से अधिक छात्र नीट यू जी प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं। लेकिन नीट पीजी के लिए छात्रों की संख्या घटकर 20 से 25 हजार ही रह जाती है। इसमें वो छात्र भी शामिल रहते हैं जिन्होंने काफी पहले अपना एमबीबीएस पूरा कर लिया है। छात्र पसंद का कोर्स करने के लिए लंबा इंतजार भी करते हैं।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.