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यूनिवर्सिटीज में पीएचडी की सीटें कम प्राइवेट में जाने के लिए मजबूर स्टूडेंट्स

चंडीगढ़: सेंक्शन स्ट्रेंथ से कम हैं टीचर्स, पंजाब की सभी स्टेट यूनिवर्सिटीज में दिक्कत।पंजाब की स्टेट यूनिवर्सिटीज में पीएचडी की सीटें कम होने की वजह से इस समय स्टूडेंट्स प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में जाने के लिए मजबूर हैं। फैकल्टी की कमी और रिसर्च की धीमी रफ्तार जैसे कारणों की वजह से ये समस्या खड़ी हो रही है। इस समय स्टेट यूनिवर्सिटीज में टीचर्स की संख्या 30 फीसदी से 50 फीसदी ही बची है।प्राइवेट यूनिवर्सिटी पांच से सात लाख रुपए की रकम पीएचडी कराने के लिए वसूल रही है। पीयू चंडीगढ़ में फैकल्टी की कमी है। पंजाब सरकार यहां पर एक फिक्स्ड ग्रांट ही देती है और यूजीसी की लेटर ने भी भर्ती के प्रोसेस को रोक दिया है क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह नई भर्ती को बढ़ा हुआ बजट नहीं देंगे।ऐसा ही हाल गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) का है। जहां पर रेगुलर टीचर्स की संख्या सिर्फ 360 है। हालांकि 633 की जरूरत है। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में फैकल्टी कम नहीं है, लेकिन उसमें सिर्फ प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए भर्ती की गई थी और नतीजा ये है कि किसी डिपार्टमेंट में टीचर हैं नहीं तो किसी में टीचर्स अधिक हैं और स्टूडेंट कम। पीटीयू में 106 टीचर हैं, जिसमें से सिर्फ 73 ही रेगुलर हैं।मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन ने आदेश किए हैं कि अब कॉलेज स्तर पर भी कम से कम पीएचडी ही योग्यता रहेगी। इसी वजह से स्टूडेंट्स को सीटें ना हाेने के कारण प्राइवेट का रुख करना पड़ रहा है।पीयू के एक सीनियर टीचर कहते हैं कि फील्ड वर्क वाली पीएचडी यानी सोशल साइंसेज और ह्यूमनैटीज आदि के स्टूडेंटस् की एक्सटेंडेड टाइम वाली रिसर्च भी एक बड़ी वजह है कि सीटें खाली नहीं होतीं। हालांकि ये एक्सटेंड टाइम वाले स्टूडेंट 20 फीसदी से अधिक नहीं होते।कंपलसरी पीएचडी वाले मामले में यूजीसी के एक मेंबर ने विरोध भी जताया था। उनका कहना था कि इसकी वजह से स्टूडेंट्स का दोहन होगा। खासतौर पर गर्ल्स को भी दिक्कत होगी जो पहले ही अनसेफ हैं। काेरोना की वजह से दो साल के लिए इस कंपलसरी एजुकेशन वाली नोटिफिकेशन से छूट दी गई है।कुल पीएचडी 2021 केये हैं मुश्किलेंनियमानुसार असिस्टेंट प्रोफेसर के पास चार, एसोसिएट प्रोफेसर के पास 6 व प्रोफेसर के पास 8 पीएचडी रिसर्च स्कॉलर हो सकते हैं। प्रोफेसर एमराइटिस भी 65 साल की उम्र तक स्टूडेंट ले सकते हैं। पीयू चंडीगढ़ में एससी स्टूडेंट्स के लिए ओवर एंड ऑल सीट का प्रावधान है लेकिन वह भी विशेष परिस्थितियों में।फैकल्टी की भर्ती क्वालिटी ऑफ एजुकेशन के लिए जरूरी है। अब प्रोफेशनल कोर्सेज पर ज्यादा जोर है, लेकिन बेसिक पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।-प्रो अरविंद, वीसी पीयू पटियालामुझे नहीं लगता फैकल्टी की कहीं कमी है। यूजीजी के नियमानुसार टीचर्स को 14 से 16 लेक्चर लेने होते हैं। रिसर्च की संख्या तय है। हम समय-समय पर टीचर्स की भर्ती करते रहते हैं। -प्रो जसपाल सिंह, वीसी, जीएनडीयूयूनिवर्सिटीज में टीचरों की संख्या कम है। निजी संस्थानों में फैकल्टी का रेशो देखेंगे तो समझ आ जाएगा कि उनके आगे बढ़ने या परफॉर्म करने की वजह क्या है। इस दिशा में हमारी यूनिवर्सिटी की ओर से भी प्रयास जारी हैं।- प्रो रेनू विग, कार्यकारी वीसी, पीयूपीटीयू में रेगुलर टीचर्स की भर्ती का प्रोसेस शुरू होने वाला है। अगले सप्ताह ही रोस्टर को फाइनलाइज कर दिया जाएगा। हम इस बात से पूरी तरह से वाकिफ हैं कि रिसर्च पीएचडी स्कॉलर्स के साथ ही होगी व रिसर्च रेगुलर फैकल्टी ही करवा सकती है।

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