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आजमगढ़ की जेल में बंद हैं रमाकांत, लोकसभा उपचुनाव में परिवार की हार के बाद अखिलेश का पहला दौरा

आजमगढ़: आजमगढ़ जेल में बंद बाहुबली सपा विधायक रमाकांत यादव से मिलने आ रहे हैं अखिलेश यादव, जहरीली शराब कांड की विवेचना में आया है नाम।बाहुबलियों से परहेज करने वाले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव आज सपा के बाहुबली विधायक रमाकांत यादव से मिलने आजमगढ़ आ रहे हैं। जिले की फूलपुर पवई से सपा विधायक रमाकांत यादव आजमगढ़ की जेल में बंद हैं। अखिलेश यादव दोपहर दो बजे इटौरा जेल आएंगे और तीन बजे वापस लखनऊ लौट जाएंगे। आजमगढ़ जिले से तीन वर्ष तक सांसद रहे अखिलेश यादव आजमगढ़ की जनता की समस्याओं को लेकर कभी सामने नहीं आए। 21 फरवरी को हुई जहरीली शराब कांड की विवेचना में सपा विधायक रमाकांत यादव का नाम सामने आया। इस मामले में रमाकांत यादव के भांजे के खिलाफ गैंगेस्टर, रासुका की कार्रवाई के साथ 14 A गैंगेस्टर अधिनियम के तहत रंगेश यादव की संपत्ति को भी कुर्क किया जा चुका है। जहरीली शराब पीने से 13 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पूर्व अखिलेश यादव सपा के पूर्व विधायक श्याम बहादुर यादव की मां के निधन के अवसर पर 17 मई को जिले में आए थे। लोकसभा उपचुनाव में चचेरे भाई धर्मेन्द्र यादव की हार के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का यह पहला दौरा है।आजमगढ़ जेल में बंद सपा के बाहुबली विधायक रमाकांत यादव से मिलने आज आ रहे अखिलेश यादव।2017 में बाहुबलियों के कारण ही चाचा से हुई अदावतसपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव की 2017 के विधानसभा चुनाव में अदावत की शुरूआत ही बाहुबली थे। सपा के एक पूर्व मंत्री और चाचा शिवपाल के रास्ते पूर्वांचल के अंसारी बंधुओं की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय को लेकर अखिलेश यादव ने सपा के कद्दावर मंत्री बलराम यादव को अपनी कैबिनेट से बर्खास्त तक कर दिया था। अब ऐसे में कौन सी मजबूरी है जो सपा सुप्रीमों को खींचकर ले आ रही है।डैमेज कंट्रोल रोकने की कोशिशसपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के इस दौरे के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जिले में एक बड़ा धड़ा है जो रमाकांत यादव के साथ है। जिस तरह से आजम खान की नजरअंदाजी सपा को भारी पड़ी है। ऐसे में यदि यादव सपा से नाराज हुआ तो सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उपचुनाव में सपा की हार अभी भी पार्टी को हजम नहीं हो रही है। सपा सुप्रीमो अपने पुराने गढ़ को हर हाल में बचाना चाहते हैं।तीन बार बदला प्रोग्रामसपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को आजमगढ़ आने का प्रोग्राम तीन बार बदला। पहले अखिलेश यादव को 19 अगस्त को आना था। अचानक कार्यक्रम में परिवर्तन हुआ और 23 अगस्त को आने का प्रोग्राम बना। 21 अगस्त को अचानक 22 अगस्त को आने का प्रोग्राम बना।जनता की उम्मीदों पर नहीं खरे उतरे अखिलेशआजमगढ़ की जनता ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस उम्मीद से भारी बहुमत से चुनाव जिताया था उन उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे और अंत में इस्तीफा देकर चले भी गए। जिले की जनता जब संकट में थी और जिस समय अखिलेश यादव के सहारे की जरूरत थी, अखिलेश यादव सहारा नहीं बन सके। जिले की जनता को कोरोना जैसी त्रासदी, एनआरसी मुद्दा, मुबारकपुर में डायरिया से मौत का मामला हो या बाढ़ के कारण जिले का डूबना। ऐसे में जिस समय जिले की जनता को जरूरत थी, अखिलेश यादव का साथ नहीं मिला। जिले के बड़े नेताओं के यहां आंगन करने जरूरत आते रहे हैं और वहीं से वापस लखनऊ चले जाते रहे हैं।रमाकांत यादव का राजनीतिक सफर1985 से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले रमाकांत यादव सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस सहित सभी दलों की परिक्रमा कर चुके हैं।1985 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा का चुनाव जीते। 1989 में बसपा से चुनाव लड़े और चुनाव जीते। 1991 में समाजवादी जनता पार्टी से तीसरी बार विधानसभा का चुनाव जीते। 1993 में सपा के टिकट पर चौथी बार विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे। 1996 में पहली बार सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीते। 1999 में एक बार फिर सपा के सिंबल पर लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहे। 2004 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहे। 2009 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते। 2014 का लोकसभा मुलायम सिंह यादव से हार गए। 2019 में भाजपा से टिकट न मिलने पर कांग्रेस के टिकट पर भदोही से लोकसभा से चुनाव लड़ने चले गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में पांचवी बार विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे।

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