ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

रेंट एग्रीमेंट 11 महीने का ही क्यों बनाया जाता है

देश में घर किराये लेने पर आपने जरूर एक रेंट एग्रीमेंट बनवाया होगा। आपने एक बात नोटिस की होगी कि आप लंबे समय के लिए घर किराये पर लेते हैं, फिर भी मकान मालिक आपको केवल 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनाकर देता है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब आप एक लंबी अवधि यानी दो या तीन साल के लिए घर किराये पर लेते हैं, तो भी रेंट एग्रीमेंट अधिक समय का क्यों नहीं बनता?
इसका कारण है कानूनी दांव-पेंच। भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 (Indian Regration Act 1908) की धारा 17 (डी) के तहत देश में एक साल में कम अवधि वाले रेंट एग्रीमेंट और लीज एग्रीमेंट के पंजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं होती है। इस कारण मकान मालिक को पंजीकरण शुल्क नहीं देना पड़ता है।
कानून के जानकारों का कहना है कि भारत में किरायेदारी से जुड़े अधिकतर कानून किरायेदार के पक्ष को अधिक मजबूत बनाते हैं। ऐसे में जब भी किसी भी मकान मालिक और किरायेदार के बीच में झगड़ा होता है, तो कानूनी लड़ाई सालों तक चलने के कारण किरायेदार प्रॉपर्टी में बना रहता है और इससे मकान मालिक को नुकसान होता है। इन सभी झंझटों से बचने के लिए मकान मालिक 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनवाते हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.