ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

चीता टास्क फोर्स बनाने को लेकर एक संशोधित आदेश जारी

भोपाल। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने चीता टास्क फोर्स बनाने को लेकर एक संशोधित आदेश जारी किया है। इससे पहले जो टास्क फोर्स बना था, उसे लेकर कुछ आईएफएस अधिकारियों में तनातनी का माहौल बन गया था। इस टास्क फोर्स की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से आए चीतों की शिकार करने की कला और कूनो नेशनल पार्क में उनके घुलने-मिलने की गतिविधियों पर नजर रखना होगा। इस लिहाज से प्रोजेक्ट चीता को सफल बनाने में यह टास्क फोर्स सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में होगा।पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यह टास्क फोर्स मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों को बसाने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए बनाया है। यह टास्क फोर्स चीतों के हेल्थ के अपडेट्स पर नजर रखने के साथ ही उनके क्वारंटाइन से बाहर निकलकर बड़े बाड़ों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया की निगरानी करेगा। यह भी देखेगा मध्यप्रदेश वन विभाग और हृञ्जष्ट्र के बनाए प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है या नहीं। साथ ही यह टास्क फोर्स चीतों के ओवरऑल स्वास्थ्य, व्यवहार और उनके घुलने-मिलने की रफ्तार के साथ-साथ उनकी शिकार करने की कला और नए घर में उनके अभ्यस्त होने की गतिविधियों पर नजर रखेगा।  इस टास्क फोर्स को कई सारे काम दिए हैं। चीतों से जुड़े सभी निर्णयों की जिम्मेदारी इसी टास्क फोर्स की रहेगी। यह ही तय करेगा कि क्वारंटाइन अवधि खत्म कर कब चीतों को बड़े बाड़ों में छोडऩा है? घास के मैदान में उन्हें कब छोडऩा उचित होगा? इसके साथ ही इलाके के आम लोगों को प्रोजेक्ट चीता में कैसे जोडऩा है, इस पर भी फैसले टास्क फोर्स ही करेगा। टास्क फोर्स के लिए आवश्यक है कि वह सभी चीता मित्रों से नियमित तौर पर बातचीत करें। चीतों के बारे में आसपास के गांवों में लोगों को जागरुक करें। साथ ही पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों की योजना बनाकर उन्हें अमलीजामा पहनाएं।इस टास्क फोर्स का कार्यकाल दो साल का रहेगा। हर महीने कम से कम एक मीटिंग होगी। यह टास्क फोर्स चीतों के बाड़ों की निगरानी के लिए एक सब कमेटी नियुक्त कर सकती है। यह फैसला टास्क फोर्स ही करेगा। टास्क फोर्स में प्रमुख सचिव (वन), प्रमुख सचिव (पर्यटन), प्रमुख मुख्य वनसंरक्षक और वन अमले का मुखिया, प्रमुख मुख्य वनसंरक्षक (वन्यप्राणी) और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन, एनटीसीए नई दिल्ली के आईजी डॉ. अमित मलिक, देहरादून के वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की साइंटिस्ट डॉ. विष्णु प्रिया, भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खांडेकर को सदस्य बनाया गया है। इसी तरह टास्क फोर्स का समन्वयक अतिरिक्त प्रमुख मुख्य वनसंरक्षक- वन्यप्राणी सुभोरंजन सेन रहेंगे।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.