ब्रेकिंग
सीने में दर्द और मिली पेट सफा की गोलियां… एक महीने खाने के बाद हुआ ये हाल सलकनपुर में टैक्सी का हुआ ब्रेक फेल, बिजली के खंभे से टकराई... 5 श्रद्धालु हो गए घायल दो नशेड़‍ियों की दोस्ती, एक शराब नहीं लाया तो दूसरे ने पेट में गुप्ती मारकर कर दी उसकी हत्या संसद में प्रियंका गांधी की एंट्री, कांग्रेस की सियासत में क्या-क्या बदलेगा? संभलः सर्वे के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को आपत्ति, निचली अदालत को एक्शन न लेने का आदेश दुनिया में झलक रही भारतीय संस्कृति… PM मोदी ने शेयर किया अनेक देशों में स्वागत का वीडियो 1700 मकानों में आई दरारें, दहशत में घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग! दूल्हा बने भैया निकले बारात लेकर, छोटा पहले ही भगा ले गया लड़की… शादी किसकी हुई? हाथ में संविधान की कॉपी लेकर प्रियंका गांधी ने ली संसद सदस्य की शपथ, राहुल के पीछे चौथी पंक्ति में ज... जब-जब मुख्यमंत्री चुनने में बीजेपी को लगे 72 घंटे, तब-तब सरप्राइज चेहरे की हुई एंट्री

शिकायती ज्ञापन और मांग पत्र संबंधी विभाग को ही भेजें कलेक्टर

 इंदौर। कलेक्टोरेट और अन्य कार्यालय में प्राप्त होने वाले शिकायती ज्ञापन और मांग-पत्र उसी विभाग को सीधे भेजा जाए, जिस विभाग से वह संबंधित है। विभाग प्रमुख इसे सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल नहीं भेजें। आगामी चुनाव से पहले शिवराज सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है। राज्य सरकार ने कलेक्टरों को निर्देश दिए है कि हर ज्ञापन की जांच करें, सीधे सामान्य प्रशासन विभाग को ना भेजें। अब नई व्यवस्था के तहत अब ज्ञापन-शिकायत पत्र सीधे संबंधित विभाग को भेजे जाएंगे। लगातार बढ़ती अव्यवस्था को देखकर जीएडी के सचिव श्रीनिवास शर्मा ने ये निर्देश जारी किए हैं।

प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभाग प्रमुख, संभागायुक्त और कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि विभिन्न संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आमजन से मिलने वाले मांग और शिकायती पत्र, जिला स्तर पर प्राप्त होने वाले सभी ज्ञापन की जांच करें। यदि समस्या, मांग या शिकायत जिला या संभाग स्तरीय है, तो उसे उसी स्तर पर निराकृत करें, इससे समय भी बचेगा। वहीं यह सुनिश्चित करें कि वह किस विभाग से संबंधित है। सीधे उसी विभाग को भेजें। सामान्य प्रशासन विभाग को ना भेजें। वही ज्ञापन सीधे मंत्रालय भेजे जाएं, जो जीएडी से सीधा संबंध रखते हों।

चुनावी वर्ष में बढ़ी ज्ञापन-शिकायत पत्रों की संख्या

दरअसल, चुनावी साल में शिकायत और मांग पत्रों की संख्या बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर कर्मचारी एवं सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि और आमजन कलेक्टर या संभागायुक्त को शिकायत या मांग पत्र सौंप रहे हैं, जो ज्यादातर मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव के नाम होते हैं, उन्हें बिना देखें सीधे जीएडी को भेज दिए जाते हैं। मंत्रालय में आने पर जीएडी को इनकी छंटाई करानी पड़ती है और फिर संबंधित विभागों को भेजना पड़ता है। इसी अव्यवस्था से तंग आकर जीएडी के सचिव श्रीनिवास शर्मा ने निर्देश जारी किए हैं।

अब तक ऐसी थी व्यवस्था

बता दें कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम मिलने वाले आवेदनों को मंत्रालय भेजने का नियम है, ऐसे आवेदन विकासखंड, तहसील, जिला और संभाग मुख्यालयों पर चुनावी समय में बड़ी संख्या में आते हैं, इसके चलते सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सुनवाई की व्यवस्था में बदलाव कर दिया है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.