एनआइआरएफ रैंकिंग में मैनिट 10 पायदान नीचे खिसका एनएलआाइयू भी 15वें से गिरकर 18वें स्थान पर
भोपाल। भोपाल ही नहीं, देश-विदेश को नामी प्रोफेसर, इंजीनियर देने वाला मैनिट उड़ान भरने की बजाय नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) रैकिंग में 70वें स्थान से खिसककर 80 पर आ गया है। इसकी एक नहीं, बल्कि पांच प्रमुख वजह हैं। इनमें पर्याप्त फेकल्टी का नहीं होना, संस्थान में बार-बार विरोध प्रदर्शन के चलते पढ़ाई प्रभावित होना, कुछ प्रोफेसरों के बीच मामूली विवाद होना, शोध कार्यों पर विशेष जोर न देना है।
अब यदि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय संस्थान (एनएलआइयू) की बात करें तो यह संस्थान 15वें स्थान से सिखकर 18 स्थान पर पहुंच गया है। इसकी वजह पूर्व के वर्षों में कुछ मामलों को लेकर हुए विवाद हो सकते हैं। साथ ही शोध कार्यों में पिछड़ना है। हालांकि इन दोनों ही संस्थानों में मुख्य पदों पर नए अधिकारियों ने जिम्मेदारियां संभाली है, जो कमियों की पड़ताल कर आने वाले वर्ष में रैकिंग सुधारने की बात कह रहे हैं। आर्किटेक्चर संस्थान की श्रेणी में स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर ने 11वें स्थान पर जगह बनाई है। शहर से आइसर के अलावा एक भी संस्थान ने समग्र श्रेणी में जगह नहीं बनाई है। इन संस्थानों के प्रमुखों का कहना है कि वे कमियों की समीक्षा करेंगे और उसे पूरा करने के लिए नए सिरे से प्रयास करेंगे।
ये 13 श्रेणियां, जिनमें संस्थानों को परखा
एनआइआरएफ के तहत संस्थानों की रैंकिंग जारी की गई है। 13 श्रेणी में रैंकिंग की जाती है। इसमें समग्र श्रेणी, विश्वविद्यालय, कालेज, शोध संस्थान, इंजीनियरिंग संस्थान, मैनेजमेंट, फार्मेसी, मेडिकल, डेंटल, विधि, आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, एग्रीक्लचर एंड एलायड सेक्टर व इनोवेशन में संस्थानों की रैंकिंग की जाती है। इसमें टीचिंग, लर्निंग एंड रिसोर्सेस, रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रेक्टिसेस, ग्रेजुएशन आउटकम, शोध फेकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर मापदंड पर संस्थानों को परखा गया है। एनआइआरएफ रैंकिंग के लिए भोपाल के एक भी सरकारी कालेज शामिल है।
विश्वविद्यालय व कालेज की श्रेणी में प्रदेश से एक भी संस्थान शामिल नहीं
विश्वविद्यालय व कालेज की श्रेणी की रैंकिंग में प्रदेश से एक भी विश्वविद्यालय और कालेज का नाम शामिल नहीं है। हालांकि राजधानी के किसी भी कालेज ने आवेदन नहीं किया था, सिर्फ एक उच्च उत्कृष्टता संस्थान ने आवेदन किया था, लेकिन रैंकिंग में संस्थान शामिल नही है।
एनएलआइयू तीन पायदान नीचे खिसका है। अगली बार टाप-10 विधि संस्थान में आने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संस्थान की रैंकिंग खिसकने का कारण का पता करेंगे। अगले साल रैंकिंग में सुधार के लिए फैकल्टी का प्रशिक्षण, शोध और पीएचडी प्रोग्राम भी शुरू करेंगे।
– डा. एस सूर्यप्रकाश, कुलपति, एनएलआइयू
मैनिट के नवनियुक्त डायरेक्टर केके शुक्ला से नवदुनिया की सीधी बातचीत
सवाल- आप मैनिट के लिए पहली प्राथमिकता क्या समझते हैं?
जवाब- राष्ट्रीय स्तर का संस्थान है तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहली प्राथमिकता है और होनी भी चाहिए।
सवाल- इस बार मैनिट ने एनआइआरएफ रैंकिंग में 80वां स्थान पाया है, जबकि पिछले साल 70 पर था। रैंकिंग सुधारने के लिए क्या प्रयास करेंगे?
जवाब- रैंकिंग की पूरी डिटेल देखेंगे। पिछले सालों की रैंकिंग की तुलना करेंगे कि कहां नीचे गया है। हालांकि प्वाइंटस पिछले साल से ज्यादा मिले हैं।
सवाल- क्या कारण है कि मैनिट इंजीनियरिंग संस्थानों में 10 अंक नीचे खिसका?
जवाब- अभी संस्थान को बारीकि से समझने में लगा हूं कि क्या कमियां है। उसे दूर करने का प्रयास करेंगे। वर्तमान में शिक्षकों और पीजी में विद्यार्थियों की संख्या कम है। इसे बढ़ाएंगे।
सवाल- शोध के क्षेत्र में मैनिट ने कोई जगह नहीं बनाई है। इसकी क्या वजह रही?
जवाब- संस्थान में अच्छे शोध हो, इसके लिए जोर देंगे। फैकल्टी की भर्ती करेंगे, ताकि शोध पर ध्यान दें सकें।
सवाल- आपने बताया कि पीजी में विद्यार्थियों की संख्या कम है, इसकी वजह क्या मानते हैं?
जवाब- इन दोनों पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या कम हो रही है। इसका कारण पता करेंगे। यदि जरूरत पड़ी तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वर्तमान के अनुरूप पाठ्यक्रम में संशोधन करेंगे।
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